स्कूलों में ‘सार्थक नाम अभियान’ शुरू, अब मंगतिया , चोरमल और ‘शैतान’ जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति

स्कूलों में 'सार्थक नाम अभियान' शुरू, अब मंगतिया , चोरमल और 'शैतान' जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति
shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025
bothra school , gangashahar

राजस्थान शिक्षा विभाग की अनूठी पहल

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

बीकानेर ,14 अप्रैल। राजस्थान के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले उन हजारों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है, जिन्हें अपने ‘अटपटे’ या ‘अर्थहीन’ नामों के कारण अक्सर शर्मिंदगी और हीन भावना का सामना करना पड़ता था। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए ‘सार्थक नाम अभियान’ शुरू करने का निर्णय लिया है।

pop ronak

नाम बदलने का मिलेगा विकल्प

शिक्षा विभाग के संयुक्त शासन सचिव ने माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा निदेशकों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर बच्चों के नाम घसीटाराम, नाहर, नन्नूमल, शैतान या खोजाराम जैसे रख दिए जाते हैं। विभाग का मानना है कि ऐसे नकारात्मक नामों का बच्चों के मानसिक विकास और आत्मसम्मान पर बुरा असर पड़ता है।

2950 नामों की सूची तैयार

विभाग ने इस अभियान के तहत 2950 सार्थक नामों की एक विशेष सूची तैयार की है, जिसमें 1541 छात्राओं और 1409 छात्रों के नाम शामिल हैं।

अर्थ सहित जानकारी: इस लिस्ट में न केवल नए नाम दिए गए हैं, बल्कि उनके अर्थ भी स्पष्ट किए गए हैं ताकि अभिभावक सोच-समझकर चुनाव कर सकें।

कोई दबाव नहीं: शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी भी अभिभावक पर नाम बदलने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा।

PTM और SMC के जरिए जागरूकता

स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) और स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के माध्यम से माता-पिता को इस मुहिम के प्रति जागरूक करें। शिक्षकों को संवेदनशीलता के साथ ऐसे बच्चों की पहचान करने को कहा गया है जिनके नाम अर्थहीन हैं।

बदलाव की प्रक्रिया

नए प्रवेश: पहली कक्षा में एडमिशन के समय ही पेरेंट्स को यह लिस्ट दिखाई जाएगी ताकि वे शुरू से ही सकारात्मक नाम चुन सकें।

पुराने छात्र: जो छात्र पहले से पढ़ रहे हैं और नाम बदलना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित नियमों के तहत आवेदन करना होगा।

निगरानी: विभाग के आला अधिकारी इस अभियान की प्रगति की नियमित रिपोर्ट मुख्यालय भेजेंगे।

शिक्षा विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास जगाना और उनके व्यक्तित्व को एक नई, सकारात्मक पहचान देना है।