बीकानेर में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का ‘प्रोटेस्ट डे’
बीकानेर में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का 'प्रोटेस्ट डे'



- राज्यपाल के नाम सौंपा 196वां ज्ञापन
बीकानेर ,17 अप्रैल। बीकानेर में राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थाई बेंच की बहाली को लेकर अधिवक्ताओं का संघर्ष निरंतर जारी है। बार एसोसिएशन, बीकानेर द्वारा हर माह की 17 तारीख को मनाए जाने वाले ‘प्रोटेस्ट डे’ के तहत आज बार अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। अधिवक्ताओं ने “हाईकोर्ट बेंच मांग नहीं अधिकार है” के नारों के साथ अपनी आवाज बुलंद की।


पूर्व में कार्यरत हाईकोर्ट को बहाल करने की मांग


जिला कलक्टर निशांत जैन को राज्यपाल के नाम और जिला न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधिपति के नाम 196वां ज्ञापन सौंपते हुए बार अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित ने एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीकानेर कोई नई बेंच की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि उस हाईकोर्ट को पुनः बहाल करने की मांग कर रहा है जो वर्ष 1922 से 1948 तक बीकानेर में सुचारू रूप से कार्यरत थी। राजस्थान राज्य के गठन के समय हुई संधि के तहत इसे जोधपुर स्थानांतरित कर दिया गया था।
भौगोलिक परिस्थितियां और जनता की परेशानी
ज्ञापन में बताया गया कि बीकानेर संभाग की भौगोलिक स्थिति और न्यायिक कार्यों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यहाँ बेंच की आवश्यकता अनिवार्य है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे सीमावर्ती जिलों के वादियों को न्याय के लिए 500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर जोधपुर जाना पड़ता है, जो आर्थिक और शारीरिक रूप से शोषणकारी है। अधिवक्ताओं के अनुसार, राजस्थान के अन्य जिलों की तुलना में बीकानेर में बेंच की आवश्यकता सर्वाधिक तार्किक है।
अधिवक्ता समुदाय की भारी उपस्थिति
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम में बार सचिव हेमंत सिंह चौहान, लेखराम धतरवाल, धर्मेंद्र वर्मा, सुरेंद्रपाल शर्मा, सुधीर श्रीमाली, हरिनारायण सारस्वत, ओम भादाणी और महेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिवक्ता शामिल हुए। महिला अधिवक्ताओं में दीपा खत्री और गिरिजा पुरोहित ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। बार एसोसिएशन ने संकल्प दोहराया कि जब तक बीकानेर का हक वापस नहीं मिल जाता, यह आंदोलन हर माह इसी तरह जारी रहेगा।
