शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने निदेशक को सौंपा ज्ञापन; पदोन्नति के बाद ऑनलाइन काउंसलिंग से पदस्थापन की मांग
शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने निदेशक को सौंपा ज्ञापन; पदोन्नति के बाद ऑनलाइन काउंसलिंग से पदस्थापन की मांग


- प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने दूर-दराज के क्षेत्रों में तबादलों पर जताई चिंता; कहा- सेवानिवृत्ति के करीब बैठे कार्मिकों को भेजा जा रहा 700 किमी दूर
- जयपुर व बीकानेर संभाग की रुकी हुई डीपीसी (DPC) जल्द कराने की मांग; निदेशक ने 3 जून को विस्तृत वार्ता के लिए बुलाया
बीकानेर, 1 जून । शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ राजस्थान, बीकानेर के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य के नेतृत्व में सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से मुलाकात की। इस दौरान मंत्रालयिक कर्मचारियों और अधिकारियों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं व पदोन्नति के बाद पदस्थापन की विसंगतियों को लेकर दो अलग-अलग महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपकर विस्तृत वार्ता की गई। निदेशक महोदय ने दोनों ज्ञापनों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए तत्काल सकारात्मक कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया है।


ऑनलाइन काउंसलिंग से हो पदस्थापन, विसंगतियां हों दूर
संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने पहले ज्ञापन के माध्यम से निदेशक को अवगत कराया कि शिक्षा विभाग में हाल ही में सहायक कर्मचारी से कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant), कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक (Senior Assistant), वरिष्ठ सहायक से सहायक प्रशासनिक अधिकारी (APO) तथा सहायक प्रशासनिक अधिकारी से अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी (AAO) के पदों पर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।


संघ ने पुरजोर मांग की है कि इन सभी संवर्गों की पदोन्नति के बाद रिक्त पदों पर पदस्थापन की प्रक्रिया पूरी तरह ‘ऑनलाइन काउंसलिंग’ (Online Counseling) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए। इसके अलावा, ज्ञापन में जयपुर और बीकानेर संभाग में काफी समय से लंबित चल रही कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक पद की डीपीसी को भी अविलंब करवाने का आग्रह किया गया।
उम्र के इस पड़ाव में 300 से 700 किमी दूर तबादले अनुचित
निदेशक को सौंपे गए दूसरे ज्ञापन में मंत्रालयिक अधिकारियों और कर्मचारियों के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे स्थानांतरणों (तबादलों) पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। वार्ता के दौरान प्रदेशाध्यक्ष आचार्य ने भावुक और तार्किक पक्ष रखते हुए कहा कि प्रशासनिक ढांचे में काम करते हुए एक मंत्रालयिक कर्मचारी जब संस्थापन अधिकारी (Establishment Officer) जैसे उच्च पद तक पहुंचता है, तब वह अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) के बिल्कुल करीब होता है।
जीवन और नौकरी के इस अंतिम पड़ाव और ढलती उम्र में कर्मचारियों को उनके गृह जिले या संभाग से 300 से लेकर 700 किलोमीटर दूर स्थानांतरित किया जा रहा है, जो व्यावहारिक और मानवीय दृष्टिकोण से कतई उचित नहीं है। इससे कर्मचारियों को भारी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
निदेशक ने दिया आश्वासन, 3 जून को होगी बड़ी बैठक
कर्मचारी संघ की ओर से पुरजोर शब्दों में निवेदन किया गया कि दोनों ज्ञापनों पर त्वरित प्रशासनिक कार्यवाही अमल में लाई जाए, ताकि पदोन्नत हुए मंत्रालयिक कर्मचारियों व अधिकारियों को समय पर आर्थिक लाभ मिल सके और पदस्थापन की देरी के कारण उन्हें वरिष्ठता का नुकसान न उठाना पड़े।
निदेशक महोदय ने संघ के तर्कों से सहमति जताते हुए दोनों मामलों पर तत्काल नियमानुसार कार्यवाही शुरू करने का आश्वासन दिया। साथ ही, इन सभी तकनीकी और प्रशासनिक बिंदुओं पर अंतिम निर्णय और विस्तृत समीक्षा के लिए आगामी 3 जून 2026 को संगठन के पदाधिकारियों को एक उच्च स्तरीय विशेष वार्ता के लिए पुनः आमंत्रित किया है।
ज्ञापन सौंपने और सफल प्रारंभिक वार्ता के अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य के साथ प्रदेश कोषाध्यक्ष नवरत्न जोशी सहित संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने सकारात्मक रुख के लिए निदेशक महोदय का आभार व्यक्त किया।


