बीकानेर में खड़ी कार का पंजाब में कट गया Toll Tax, फास्टैग के ‘भूतिया’ ट्रांजेक्शन से वाहन मालिक के उड़े होश

बीकानेर में खड़ी कार का पंजाब में कट गया Toll Tax
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 16 मई। डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहाँ फास्टैग (FASTag) ने हाईवे पर सफर को आसान और कैशलेस बनाया है, वहीं अब इसकी तकनीकी खामियां आम जनता के लिए जी का जंजाल बनती जा रही हैं। राजस्थान के बीकानेर से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के दावों और इसकी सुरक्षा प्रणाली को पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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बीकानेर के रहने वाले वाहन मालिक अल्ताफ अहमद की कार घर के गैराज में लॉक खड़ी थी, लेकिन सैकड़ों किलोमीटर दूर पंजाब के एक टोल प्लाजा ने उनकी गाड़ी का ऑनलाइन टोल टैक्स काट लिया।

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आधी रात को आया मैसेज, पैरों तले खिसकी जमीन
पीड़ित अल्ताफ अहमद ने बताया कि 14 मई की रात को वह अपने घर पर थे और उनकी गाड़ी हमेशा की तरह गैराज में खड़ी थी। रात करीब 11:30 बजे जब उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया, तो वह हैरान रह गए। उनके फास्टैग अकाउंट से ₹155 कटने का अलर्ट आया था।

मैसेज में साफ लिखा था कि यह टोल पंजाब के मोर्य टोल प्लाजा पर कटा है। अल्ताफ इस बात से परेशान हैं कि जो गाड़ी बीकानेर से हिली तक नहीं, वह आधी रात को पंजाब का टोल कैसे पार कर सकती है।

 


ANPR और फास्टैग तकनीक की खुली पोल: क्या है असली खेल?

इस घटना ने टोल प्लाजा पर इस्तेमाल होने वाले ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों के मुताबिक इस ‘भूतिया’ टोल कटौती के पीछे दो मुख्य वजहें हो सकती हैं:

क्लोन नंबर प्लेट (Clone Number Plate) का खतरा: मुमकिन है कि पंजाब या उसके आसपास कोई शातिर व्यक्ति अल्ताफ की गाड़ी के नंबर की हूबहू फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूम रहा हो। जब वह गाड़ी मोर्य प्लाजा से गुजरी, तो बूम बैरियर खोलने के लिए कैमरे ने नंबर रीड किया और पैसे बीकानेर में बैठे अल्ताफ के खाते से कट गए। यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और खतरनाक है।

सॉफ्टवेयर की तकनीकी खराबी (Software Glitch): कई बार टोल प्लाजा के सर्वर में खराबी के कारण या मैन्युअल एंट्री के दौरान गलत नंबर फीड हो जाता है, जिससे किसी दूसरी गाड़ी का टोल किसी और मासूम उपभोक्ता के खाते से कट जाता है।

पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले: राजस्थान में बिना यात्रा किए ही फास्टैग वॉलेट से पैसे साफ होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जयपुर, जोधपुर और अजमेर से भी ऐसी कई शिकायतें आ चुकी हैं। आम जनता का कहना है कि टोल सिस्टम में सख्त निगरानी और ‘क्रॉस वेरिफिकेशन’ की भारी कमी है।

फास्टैग सिस्टम पर खड़े होते 5 बड़े सवाल
बिना स्कैनिंग पेमेंट कैसे?: जब गाड़ी घर पर खड़ी है, तो टोल के सेंसर ने उसे कैसे और किस आधार पर पढ़ा?

क्लोनिंग का खेल: क्या टोल इंफ्रास्ट्रक्चर इतना कमजोर है कि कोई भी फर्जी नंबर प्लेट लगाकर किसी और के खाते से पैसे कटवा सकता है?

सेंसर का ‘अंधापन’?: क्या टोल प्लाजा के कैमरे और सेंसर इतने दोषपूर्ण हैं कि वे बिना गाड़ी की भौतिक मौजूदगी के रैंडम पैसे काट रहे हैं?

डेटा सिक्योरिटी: क्या वाहन स्वामियों का फास्टैग डेटा पूरी तरह सुरक्षित है या इसमें कोई तकनीकी सेंधमारी हुई है?

रिफंड की जटिलता: गलत टोल कटने पर आम आदमी को ₹150-₹200 के रिफंड के लिए घंटों कस्टमर केयर और ईमेल के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस मानसिक परेशानी का जिम्मेदार कौन है?


अगर आपके साथ भी ऐसा हो, तो तुरंत करें ये काम
यदि आपकी गाड़ी भी घर पर खड़ी है और गलत तरीके से टोल कट जाता है, तो इन माध्यमों से तुरंत शिकायत दर्ज कराएं:

राष्ट्रीय हेल्पलाइन: NHAI के टोल-फ्री नंबर 1033 पर तुरंत कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं।

ईमेल द्वारा शिकायत: अपने ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट के साथ अपनी शिकायत falsededuction@ihmcl.com पर भेजें।

बैंक डिस्प्यूट: जिस बैंक या ऐप (जैसे Paytm, PhonePe, SBI आदि) का फास्टैग है, उसके कस्टमर केयर पर तुरंत ‘Dispute’ रेज करें।

नियम क्या कहता है?: NHAI के नियमों के मुताबिक, गलत टोल कटौती करने वाली टोल एजेंसियों पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

सुरक्षा टिप: अपने फास्टैग को सीधे अपने मुख्य बैंक खाते से लिंक करने के बजाय हमेशा एक सीमित राशि वाले डिजिटल वॉलेट से लिंक रखें, ताकि आपके बैंक खाते की गोपनीयता और सुरक्षा बनी रहे।

 

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