शनि अमावस्या पर केसरिया हनुमान मंदिर में वट सावित्री पूजन

शनि अमावस्या पर केसरिया हनुमान मंदिर में वट सावित्री पूजन
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quicjZaps 15 sept 2025
  • अखंड सौभाग्य की कामना के साथ महिलाओं ने की वट वृक्ष की परिक्रमा

बीकानेर, 16 मई। शनि अमावस्या के पावन और दुर्लभ संयोग पर शनिवार को पुरानी गिनानी स्थित केसरिया हनुमान मंदिर परिसर में सुहागिन महिलाओं द्वारा पूरी श्रद्धा, अटूट आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ वट सावित्री व्रत एवं पूजन किया गया। इस धार्मिक उत्सव को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर में महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया।

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सावित्री-सत्यवान की कथा और अखंड सौभाग्य का संकल्प
मंदिर के पुजारी पंडित केशव शुक्ला ने उपस्थित महिलाओं को वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व बताते हुए सावित्री-सत्यवान की पौराणिक और प्रेरणादायी कथा सुनाई। उन्होंने कहा संस्कृति का प्रतीक: वट सावित्री व्रत भारतीय सनातन संस्कृति में अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और खुशहाल दांपत्य जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक है।

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त्रिदेवों का वास: वट वृक्ष (बड़ के पेड़) में साक्षात त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का स्वरूप माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन में स्थिरता, सुख और शांति का आगमन होता है।

कच्चा सूत लपेटकर की परिक्रमा, मंदिर में हुआ हवन
पारंपरिक वेशभूषा और सोलह श्रृंगार कर पहुंची महिलाओं ने सर्वप्रथम केसरिया हनुमान जी के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे एकत्र होकर रोली, मौली, अक्षत, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित कर पूजा-अर्चना की। सुहागिनों ने अपने पति की लंबी आयु की मंगलकामना करते हुए वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की और रक्षा सूत्र बांधा।

शनि अमावस्या के विशेष अवसर पर मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष हवन का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर विश्व कल्याण और परिवार की खुशहाली की कामना की।  कथा श्रवण और पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने भगवान की सामूहिक आरती की और पारंपरिक धार्मिक भजनों का गायन कर भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को जीवंत स्वरूप प्रदान किया।

 

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