विश्वविद्यालय की कृषि योग्य भूमि का हो शत-प्रतिशत उपयोग
विश्वविद्यालय की कृषि योग्य भूमि का हो शत-प्रतिशत उपयोग


- कुलगुरु ने बीज उत्पादन कार्यक्रम की समीक्षा कर दिए निर्देश
बीकानेर, 20 मई। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) अब गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन बढ़ाने और किसानों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए अपनी विशेष ‘सीड पॉलिसी’ तैयार करेगा। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने बुधवार को ‘खरीफ 2026 बीज उत्पादन कार्यक्रम’ की समीक्षा बैठक के दौरान इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।


कुलगुरु डॉ. दुबे ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध समस्त कृषि योग्य भूमि का शत-प्रतिशत उपयोग बीज उत्पादन के लिए किया जाए। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को लक्ष्य निर्धारित कर जिले की मुख्य फसलों के सर्टिफाइड बीज तैयार करने को कहा, ताकि स्थानीय किसानों की जरूरतों को मौके पर ही पूरा किया जा सके। बैठक में मोठ, मूंगफली, तिल और ग्वार जैसी क्षेत्रीय फसलों की उन्नत वैरायटी को उत्पादन कार्यक्रम में प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कुलगुरु ने ‘थार शोभा खेजड़ी’ की पौध तैयार करने और आवश्यकता पड़ने पर किसानों के खेतों (फार्मर्स लैंड) पर भी बीज उत्पादन कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए।


अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने खरीफ 2026 के कार्यक्रम पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि बीज और विद्यार्थी ही विश्वविद्यालय के असली ब्रांड एंबेसडर हैं। उन्होंने बीज की गुणवत्ता और मात्रा में वृद्धि को सीधे तौर पर किसानों की आय से जोड़ा। वहीं, प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. दीपाली धवन ने हॉर्टिकल्चर (उद्यानिकी) को भी इस कार्यक्रम में शामिल करने का सुझाव दिया।
दलहन अनुसंधान केंद्र के डॉ. सुधीर कुमार ने केंद्रीय कृषि संस्थानों के साथ मिलकर स्थानीय फसलों पर शोध करने और किसानों को ‘मिनिकिट’ वितरित करने की बात कही, जिससे विश्वविद्यालय के बीजों की ब्रांडिंग मजबूत हो सके। बैठक में डॉ. एच. एल. देशवाल, डॉ. वीर सिंह, डॉ. सीमा चावला सहित विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों के वैज्ञानिक एवं प्रभारी उपस्थित रहे।


