माखन लीला और गिरिराज धारण प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, पांडाल में बही भक्ति की धारा
माखन लीला और गिरिराज धारण प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, पांडाल में बही भक्ति की धारा


- बीकानेर में श्रीमद् भागवत कथा
बीकानेर, 22 मई । जीवन नाथ बगीची रोड स्थित पवित्र हाउस में आयोजित श्रीमद् भागवत लीलामृत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान में कथा व्यास पंडित संतश्री महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत सुंदर और मर्मस्पर्शी वर्णन किया।


कथा प्रवाह के दौरान महाराज श्री ने माखन चोर लीला, माखन मिश्री भोग और गोवर्धन (गिरिराज) धारण सहित विभिन्न प्रसंगों का विस्तृत विवेचन किया। उन्होंने व्यास पीठ से संदेश देते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण की प्रत्येक बाल लीला मानव जीवन को धर्म, सत्य, निष्कपट प्रेम और अनन्य भक्ति का मार्ग दिखाती है।


अहंकार का त्याग कर ईश्वर की शरण में जाना ही वास्तविक भक्ति: पं. संतश्री
गिरिराज धारण प्रसंग की महिमा बताते हुए कथा वाचक ने कहा कि जब इंद्र को अपनी शक्तियों और सत्ता का अहंकार हो गया, तब प्रभु ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी धन, पद या शक्ति का अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार का त्याग कर जो जीव पूर्ण रूप से ईश्वर की शरण में चला जाता है, परमात्मा स्वयं उसकी रक्षा का दायित्व संभालते हैं। कथा के दौरान बजने वाले भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूम उठे।
रंगा परिवार के सान्निध्य में हो रहा दिव्य आयोजन
आज की कथा के मुख्य यजमान शिव कुमार व्यास ने सपत्नीक मुख्य पोथी, व्यास पीठ का विधि-विधान से पूजन किया और महाआरती कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
उल्लेखनीय है कि इस भव्य श्रीमद् भागवत लीलामृत कथा का आयोजन मास्टर दामोदर दास रंगा, ज्योतिषाचार्य पंडित श्याम सुंदर रंगा एवं समस्त मरोट रंगा परिवार के सान्निध्य में संपन्न हो रहा है। आयोजन को सुव्यवस्थित बनाने में स्थानीय युवा और श्रद्धालु सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।


