राम नाम का धन जिसके पास है, वही दुनिया में सबसे बड़ा धनवान- पंडित पुरुषोत्तम व्यास ‘मीमांसक’
राम नाम का धन जिसके पास है, वही दुनिया में सबसे बड़ा धनवान- पंडित पुरुषोत्तम व्यास 'मीमांसक'


बीकानेर, 22 मई। स्थानीय सीताराम गेट के भीतर स्थित सीताराम भवन में आयोजित ‘श्री रामकथा अमृतोत्सव’ के आठवें दिन शुक्रवार को भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी बही। कथा के दौरान भगवान श्री राम, माता जानकी और लक्ष्मण के अत्रि मुनि व माता अनुसूया से मिलन तथा चित्रकूट प्रवास सहित विभिन्न रामायण प्रसंगों का सजीव चित्रण किया गया। मानस की चौपाइयों, मंत्रोच्चारण और भक्ति गीतों के बीच समूचा पाण्डाल प्रभु श्री राम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।


श्रीमती पुष्पा देवी सोमानी (धर्मपत्नी स्वर्गीय श्री सीताराम जी) एवं समस्त सोमानी परिवार द्वारा आयोजित इस कथा में कथावाचक पंडित पुरुषोत्तम व्यास ‘मीमांसक’ ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ करवाया। इसके बाद उन्होंने भगवान श्री राम की अलौकिक स्तुति “श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन, हरण भवभय दारुणम्…” का सुमधुर गान कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।


सांसारिक दिखावे से ऊपर है प्रभु भक्ति
व्यास जी ने व्यास पीठ से संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक दिखावे और भौतिक सुखों से ऊपर उठकर प्रभु की भक्ति में लीन रहना ही जीवन का वास्तविक सत्य है। उन्होंने प्रसिद्ध भजन “अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में…” सुनाते हुए कहा कि अत्रि मुनि के प्रसंग से हमें यह सीख मिलती है कि जब मनुष्य काम, क्रोध, लोभ और मोह का त्याग कर अनन्य भाव से ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाता है, तो भगवान उसकी ओर खिंचे चले आते हैं। यदि भक्त प्रभु की तरफ दो कदम बढ़ाता है, तो परमात्मा उसकी ओर चार कदम बढ़ाते हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “संसार में जिसके पास प्रभु राम नाम का धन है, वास्तव में वही सबसे बड़ा धनवान है।”
विपत्ति के समय होती है धैर्य, धर्म, मित्र और नारी की परीक्षा
गोस्वामी तुलसीदास कृत रामायण के अरण्य कांड के प्रसंगों की व्याख्या करते हुए पंडित जी ने माता अनुसूया द्वारा प्रतिपादित पतिव्रता धर्म का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने प्रसिद्ध चौपाई:
“धीरज, धर्म, मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥”
सुनाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के धैर्य, उसके धर्म, सच्चे मित्र और जीवनसंगिनी की वास्तविक पहचान केवल संकट या आपातकाल के समय ही होती है। उन्होंने विभिन्न श्रेणियों की नारियों के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि एक आदर्श धर्मपत्नी को हर परिस्थिति और काल में अपने पति का संबल बनना चाहिए।
25 मई से शुरू होगा ‘नानी बाई रो मायरो’ का दिव्य आयोजन
सोमानी परिवार के प्रवक्ता ने बताया कि वर्तमान में चल रही श्री रामकथा का समापन आगामी 24 मई को होगा। इसके तुरंत बाद, इसी परिसर (सीताराम भवन) में 25 मई से 27 मई तक तीन दिवसीय ‘नानी बाई रो मायरो’ की संगीतमय कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस कथा का वाचन वृंदावन के विख्यात पंडित देवेश दीक्षित महाराज द्वारा प्रतिदिन दोपहर बाद 3:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक किया जाएगा। सोमानी परिवार ने सभी धर्मप्रेमी भाई-बहनों से इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर पुण्य लाभ कमाने का आह्वान किया है।


