नौतपा की भीषण गर्मी के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब, बाबा श्याम को लगाया मौसमी फलों और ठंडाई का विशेष भोग
बाबा श्याम को लगाया मौसमी फलों और ठंडाई का विशेष भोग


- फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे… मेरे श्याम इतना बता दो, कहाँ तुम नहीं हो!”
बीकानेर, 27 मई। अधिक मास में आने वाली पावन पद्मिनी एकादशी (कमला एकादशी) के अवसर पर बीकानेर स्थित श्याम मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और निस्वार्थ सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान विष्णु को समर्पित इस विशेष एकादशी पर मंदिर परिसर को देश-विदेश के रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया तथा बाबा श्याम का अलौकिक व आकर्षक श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा।


विशेष पूजा-अर्चना और अलौकिक श्रृंगार
उत्सव के अवसर पर मंदिर के मुख्य पुजारी चेतन शर्मा एवं किशन जोशी द्वारा विशेष वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई। इसके पश्चात बाबा श्याम का दिव्य श्रृंगार संपन्न हुआ। फूलों की मनमोहक सजावट और सुगंधित इत्र की महक के बीच पूरा मंदिर परिसर पूरी तरह से श्याम भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।


नौतपा की गर्मी पर भारी पड़ी भक्तों की अटूट आस्था
वर्तमान में चल रहे नौतपा की तेज और झुलसाने वाली गर्मी को देखते हुए मंदिर प्रशासन और सेवाभावी भक्तों द्वारा विशेष प्रबंध किए गए। मंदिर परिसर से लेकर मुख्य प्रवेश द्वार तक छाया के लिए विशाल टेंट और ठंडी हवा के लिए बड़े कूलर लगाए गए, ताकि कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। इसके साथ ही जगह-जगह ठंडे पानी के कैंपर स्थापित किए गए, जहां सेवादार भक्तों को निरंतर शीतल जल पिलाते नजर आए।
इस दौरान आस्था का एक बेहद भावुक कर देने वाला दृश्य भी देखने को मिला, जब कई महिला श्रद्धालु अपने छोटे-छोटे बच्चों को सूती कपड़ों में लपेटकर धूप से बचाती हुई बाबा के दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़ी रहीं। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के इस अटूट विश्वास ने हर किसी को चमत्कृत कर दिया।
शीतलता प्रदान करने वाले छप्पन भोग और अखंड कीर्तन
गर्मी के इस कड़े मौसम को ध्यान में रखते हुए श्याम भक्तों द्वारा बाबा को शीतलता प्रदान करने वाले विशेष मौसमी फलों का भोग लगाया गया। इनमें मुख्य रूप से चेरी, लीची, जामुन, खुमानी और आड़ू शामिल रहे। इसके साथ ही बाबा श्याम को केसरिया ठंडाई, मटके का शरबत और विभिन्न शीतल पेय अर्पित किए गए।
मंदिर में सुबह से ही अखंड भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। स्थानीय भजन गायकों ने “कहाँ तुम नहीं हो” और “हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा” जैसे भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा पंडाल झूम उठा।
अधिक मास की एकादशी का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी का फल कई गुना अधिक होता है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके अवतारों की भक्ति करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। देर रात तक मंदिर परिसर बाबा श्याम के जयकारों से गूंजता रहा और दर्शन करने वाले सभी भक्तों को विशेष महाप्रसाद का वितरण किया गया।


