बीकानेर व्यापार एसोसिएशन और जन संघर्ष समिति ने प्रस्तावित अंडरब्रिज को बताया अव्यावहारिक और जानलेवा

बीकानेर व्यापार एसोसिएशन और जन संघर्ष समिति ने प्रस्तावित अंडरब्रिज को बताया अव्यावहारिक और जानलेवा
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quicjZaps 15 sept 2025
STBA 5 JUNE 2026
  • कोटगेट-सांखला फाटक की समस्या का ‘जुगाड़ू उपाय’ नामंजूर
  • रेलवे को होगी सालाना 2 करोड़ की बचत, लेकिन बीकानेर की जनता भुगतेगी भयंकर जाम और प्रदूषण का दंश
  • समिति का दावा: कोटगेट पर 4 मीटर का संकरा अंडरब्रिज बनेगा मुसीबत, सांखला फाटक बंद होने से कट जाएंगे मुख्य बाजार
  • जोधपुर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करने की मांग; रेल बाईपास को ही बताया स्थायी समाधान

बीकानेर, 28 मई। बीकानेर शहर की बरसों पुरानी और सबसे बड़ी समस्या ‘कोटगेट एवं सांखला फाटक रेलवे क्रॉसिंग’ के समाधान के नाम पर जिला प्रशासन और रेलवे द्वारा तैयार किए गए नए प्रस्तावों पर विवाद खड़ा हो गया है। बीकानेर व्यापार एसोसिएशन एवं जन संघर्ष समिति ने प्रशासन के इन प्रस्तावित उपायों को पूरी तरह से अव्यावहारिक, घातक और ‘जुगाड़ू उपाय’ बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। समिति का स्पष्ट आरोप है कि ये तथाकथित समाधान जनता के हितों की अनदेखी कर तैयार किए गए हैं, जो राहत देने के बजाय शहर के लिए नई और भयावह मुसीबतें खड़ी कर देंगे।

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कोटगेट प्रस्ताव: 16 मीटर चौड़ी सड़क पर मात्र 4 मीटर का अंडरब्रिज धोखा
एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जन संघर्ष समिति के एडवोकेट आर.के. दास गुप्ता ने प्रशासन के प्रस्ताव की तकनीकी कमियों को उजागर किया। उन्होंने बताया कि कोटगेट की वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित योजना में भारी विसंगतियां हैं:

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नाममात्र का अंडरब्रिज: कोटगेट की वर्तमान 16 मीटर चौड़ी सड़क पर मात्र 4 मीटर चौड़ा और 2.5 मीटर ऊंचा अंडरब्रिज बनाने का प्रस्ताव है। शेष 12 मीटर सड़क को मौजूदा स्थिति में ही छोड़ दिया जाएगा। इसका मतलब है कि रेलवे क्रॉसिंग पूरी तरह समाप्त नहीं होगा, बल्कि छोटे आकार में वहीं कायम रहेगा।

जलभराव का संकट: बीकानेर की भौगोलिक स्थिति के अनुसार, बारिश के दिनों में कोटगेट क्षेत्र का सारा पानी सीधा इस अंडरब्रिज में समा जाएगा। प्रशासन का यह दावा कि वे पंप और रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए 5 घंटे में पानी निकाल लेंगे, जनता के साथ सरासर धोखा है।

सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं से खिलवाड़: अंडरब्रिज के दोनों ओर नए चौराहे बनने से दुर्घटनाओं और भयंकर ट्रैफिक जाम की आशंका रहेगी। इस प्रस्ताव में वाहनों की वापसी (रिटर्न) का मार्ग ही स्पष्ट नहीं है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस संकरे रास्ते से दमकल (अग्निशमन वाहन), बड़ी एम्बुलेंस और पुलिस की बड़ी गाड़ियां नहीं गुजर सकेंगी, जिससे आपातकाल में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, यहाँ से गुजरने वाले 50 प्रतिशत से अधिक पैदल यात्रियों के लिए कोई सुरक्षित कॉरिडोर नहीं रखा गया है।

सांखला फाटक बंद करने से छिनेगी बाजारों की कनेक्टिविटी

एडवोकेट गुप्ता ने सांखला फाटक के प्रस्ताव को भी बीकानेर के व्यापार के लिए आत्मघाती बताया। उन्होंने कहा कि सांखला फाटक को स्थायी रूप से दीवार चुनकर बंद करने की योजना है। ऐसा होने से बीकानेर के मुख्य बाजार, स्टेशन रोड और के.ई.एम. रोड को जोड़ने वाली जीवन रेखा पूरी तरह कट जाएगी और दोनों बड़े बाजारों का आपस में संपर्क टूट जाएगा।

प्रशासन सांखला फाटक से करीब 300 मीटर दूर कोयला गली और मटका गली के बीच 5 मीटर आने और 5 मीटर जाने (कुल 10 मीटर) का अंडरपास बनाने का प्रस्ताव दे रहा है, जबकि वर्तमान में सांखला फाटक की चौड़ाई 14 मीटर है। चूंकि कोयला गली बेहद संकरी है और वहां वर्तमान में केवल एकतरफा (वन-वे) यातायात ही संभव है, ऐसे में यह नया अंडरपास पूरे शहर के ट्रैफिक का दबाव झेलने में पूरी तरह अक्षम साबित होगा।

दिन में 60 बार बंद होता है फाटक, आम जनता से छिपाई जा रही हकीकत
व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरपत सेठिया ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि वर्तमान में कोटगेट फाटक दिनभर में कुल 60 बार बंद होता है, जिसमें 40 बार केवल रेलवे इंजन की शंटिंग होती है और 20 बार ट्रेनों की आवाजाही होती है।

अध्यक्ष सेठिया ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रशासन और रेलवे के ये सभी ‘जुगाड़ू उपाय’ केवल रेलवे को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किए गए हैं। इन उपायों से रेलवे को शंटिंग और जनशक्ति के मद में सालाना लगभग 2 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी, लेकिन इसके बदले बीकानेर की आम जनता को अंतहीन ट्रैफिक जाम, वायु व ध्वनि प्रदूषण, पेट्रोल-डीजल की भारी बर्बादी और दुर्घटनाओं के साए में जीना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ये कड़वे तथ्य जिला प्रशासन द्वारा आम जनता के संज्ञान में नहीं लाए जा रहे हैं।

हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार और रेल बाईपास की मांग

समिति के पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि इस पूरे मामले पर जनहित याचिका (PIL) के तहत जोधपुर हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही है। ऐसे में प्रशासन को कोई भी अव्यावहारिक कदम उठाने से पहले माननीय उच्च न्यायालय के अंतिम फैसले का इंतजार करना चाहिए। बीकानेर व्यापार एसोसिएशन और जन संघर्ष समिति ने सर्वसम्मति से दोहराया कि बीकानेर को इस समस्या से स्थायी मुक्ति दिलाने का एकमात्र और सबसे उपयुक्त समाधान केवल ‘रेल बाईपास’ का निर्माण ही है, और इसके लिए वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

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