बीकानेर के कृष्णचन्द पुरोहित ने रचा विश्व कीर्तिमान: सुई पर सबसे छोटी पगड़ी बांधकर ‘हिन्दुस्तान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में नाम दर्ज
बीकानेर के कृष्णचन्द पुरोहित ने रचा विश्व कीर्तिमान: सुई पर सबसे छोटी पगड़ी बांधकर 'हिन्दुस्तान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में नाम दर्ज


- सुई पर मात्र 55 सेकंड में बांधी 0.65 सेमी परिधि की पगड़ी; पेंसिल पर पगड़ी और ‘चंदा’ परंपरा के संरक्षण के लिए भी हुए सम्मानित
- जयपुर के भव्य समारोह में देश-विदेश के दिग्गजों के बीच बीकानेर की कला और संस्कृति का बढ़ा मान
बीकानेर, 1 जून । बीकानेर की समृद्ध कला और साफा-पगड़ी की परंपरा को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। बीकानेर के प्रसिद्ध कलाकार कृष्णचन्द पुरोहित को जयपुर के स्वर्ण महल द बैंक्यूट हॉल में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में ‘हिन्दुस्तान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। उन्होंने सुई की नोक पर विश्व की सबसे छोटी पगड़ी बांधने का अद्भुत कारनामा कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया है।


सुई पर 55 सेकंड का जादुई प्रदर्शन
कृष्णचन्द पुरोहित ने इस विश्व रिकॉर्ड को बेहद सूक्ष्म और कठिन कलाबाजी के जरिए साकार किया। रिकॉर्ड के तकनीकी विवरण के अनुसार:


उपकरण: मात्र 5 सेमी लंबी सुई पर पगड़ी बांधी गई। समय: इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें केवल 55 सेकंड का समय लगा। माप: पगड़ी के लिए उपयोग किए गए कपड़े की लंबाई 15 सेमी थी, जबकि तैयार हुई सूक्ष्म पगड़ी की परिधि (Circumference) मात्र 0.65 सेमी मापी गई।
अन्य कलाकृतियां: सुई के अलावा उन्होंने पेंसिल पर भी पगड़ी बांधने और बीकानेर के ऐतिहासिक सौहार्द का प्रतीक ‘चंदा’ (पतंग) के संरक्षण के क्षेत्र में अपने हुनर का लोहा मनवाया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर का गौरव
समारोह में मलेशिया, सिंगापुर, नेपाल और भूटान जैसे देशों सहित पूरे भारत से आए खेल, कला, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र के दिग्गजों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त आईएएस विरेन्द्र सिंह बंकावत, डॉ. संजय ग्रेवाल, पियुष किराडू और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। बीकानेर के कृष्णचन्द पुरोहित को कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए यह प्रतिष्ठित खिताब दिया गया।
‘चंदा’ परंपरा और ऐतिहासिक सौहार्द का सम्मान
संस्था उपाध्यक्ष गौरी शंकर व्यास ने बताया कि कृष्णचन्द को यह अवार्ड न केवल पगड़ी के लिए, बल्कि बीकानेर की 500 वर्षों पुरानी ‘चंदा’ (विशेष पतंग) परंपरा को जीवित रखने के लिए भी दिया गया है। ‘चंदा’ बीकानेर के सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। पुरोहित द्वारा इस परंपरा को विश्व पटल पर पहचान दिलाना पूरे राजस्थान के लिए गौरव की बात है।
बीकानेर आगमन पर भव्य अभिनंदन
विश्व रिकॉर्ड का खिताब जीतकर बीकानेर लौटने पर आज ‘राजस्थानी साफा पाग पगड़ी व कला-संस्कृति संस्था’ के कार्यालय में कृष्णचन्द पुरोहित का भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया। संस्था के राजेश रंगा ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सुई पर पगड़ी बांधना हर किसी के बस की बात नहीं है; यह उनकी वर्षों की तपस्या और एकाग्रता का परिणाम है।
इस सम्मान समारोह के दौरान विजय कुमार पुरोहित, रामचंद्र आचार्य, विमल किशोर व्यास, उमेश पुरोहित, श्याम सुंदर किराडू सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कृष्णचन्द की इस उपलब्धि को बीकानेर की लोक कला की जीत बताया।


