विश्व दुग्ध दिवस पर महिला पशुपालकों का सम्मान, कौशल्या देवी एवं राजेश्वरी देवी बनीं ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल

विश्व दुग्ध दिवस पर महिला पशुपालकों का सम्मान
shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025
  • वेटरनरी ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह में उरमूल डेयरी के प्रबंध संचालक ने किया सम्मानित
  • बीकानेर की ग्रामीण महिलाएं बनीं दुग्ध सहकारिता आंदोलन की सबसे मजबूत कड़ी, आर्थिक रूप से हो रहीं आत्मनिर्भर

बीकानेर, 3 जून । ‘विश्व दुग्ध दिवस’ के उपलक्ष्य में बीकानेर के वेटरनरी ऑडिटोरियम में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर दुग्ध उत्पादन, पशुपालन और महिला सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली प्रगतिशील महिला पशुपालकों को सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उरमूल डेयरी बीकानेर के प्रबंध संचालक बाबूलाल बिश्नोई, वेटरनरी कॉलेज के डीन, और केमल फार्म के डीन डॉ. ए.के. गहलोत सहित डेयरी व पशुपालन विभाग के अनेक अधिकारी, पशुपालक एवं सहकारी समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

मुंडसर और जेगला की महिला दुग्ध समितियों की अध्यक्षों का बहुमान
समारोह के दौरान बीकानेर जिले की दो महिला सहकारी लीडर्स को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

pop ronak

श्रीमती कौशल्या देवी: ग्राम मुंडसर की ‘मूला खेड़ी महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति’ की अध्यक्ष (पत्नी श्री शिवलाल)।

श्रीमती राजेश्वरी देवी: जेगला पन्नादरोगा क्षेत्र की ‘सिगड़ों का बास महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति’ की अध्यक्ष (पत्नी श्री श्रवण कुमार)।

इन दोनों महिला अध्यक्षों को उनकी समितियों के बेहतर प्रबंधन, रिकॉर्ड दुग्ध संकलन और ग्रामीण परिवेश में महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने के बेहतरीन प्रयासों के लिए अतिथियों द्वारा प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

महिलाएं दुग्ध सहकारिता की सबसे मजबूत कड़ी: बाबूलाल बिश्नोई
उरमूल डेयरी के प्रबंध संचालक बाबूलाल बिश्नोई ने सम्मानित महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि राजस्थान की ग्रामीण महिलाएं आज दुग्ध उत्पादन और सहकारिता आंदोलन की सबसे मजबूत रीढ़ बन चुकी हैं। महिला दुग्ध उत्पादक समितियों के माध्यम से न केवल ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि महिलाओं में गजब की नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास भी हुआ है।

उन्होंने कौशल्या देवी और राजेश्वरी देवी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी जागरूक महिलाएं हमारे ग्रामीण समाज में बड़े आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत हैं। उरमूल डेयरी लगातार इन समितियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने, आधुनिक पशुपालन का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और दुग्ध व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सम्मान सभी सहयोगी महिलाओं की मेहनत का नतीजा
सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीमती कौशल्या देवी ने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उनकी समिति से जुड़ी उन सभी कर्मठ महिलाओं की सामूहिक मेहनत और समर्पण का परिणाम है जो सुबह-शाम पूरी ईमानदारी से कार्य करती हैं। वहीं श्रीमती राजेश्वरी देवी ने उरमूल डेयरी का आभार जताते हुए संकल्प दोहराया कि महिला सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का यह कारवां आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे और बताया कि बीकानेर संभाग में हजारों महिलाएं आज स्वतंत्र रूप से दुग्ध व्यवसाय को संभाल रही हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, आय में वृद्धि और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का सबसे प्रभावी माध्यम सिद्ध हो रही है।

sesumo school
sjps