बीकानेर के डूंगर कॉलेज में गूंजा ‘खेत बचाओ’ का नारा, NRCC के वैज्ञानिकों ने छात्रों को सिखाए रासायनिक मुक्त खेती के गुर
बीकानेर के डूंगर कॉलेज में गूंजा 'खेत बचाओ' का नारा, NRCC के वैज्ञानिकों ने छात्रों को सिखाए रासायनिक मुक्त खेती के गुर



- खेती में रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर जताई चिंता
बीकानेर, 25 जून । भारत सरकार द्वारा संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC), बीकानेर के वैज्ञानिकों द्वारा बुधवार, 24 जून 2026 को स्थानीय राजकीय डूंगर महाविद्यालय में एक दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कॉलेज के लगभग 75 विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं एनआरसीसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा इस अभियान के आयोजन सचिव डॉ. बी. श्रीशैलम ने आधुनिक खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन रसायनों का घातक प्रभाव केवल मृदा (मिट्टी) की उर्वरा शक्ति को ही नष्ट नहीं कर रहा, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से मानव एवं पशु स्वास्थ्य पर भी बेहद प्रतिकूल असर डाल रहा है। डॉ. श्रीशैलम ने जोर देकर कहा कि स्वस्थ मिट्टी से ही सुरक्षित, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन संभव है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के बीच इस वैज्ञानिक संदेश को ले जाएं और ‘खेत बचाओ अभियान’ को एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।


प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण समय की सबसे बड़ी मांग: प्राचार्य डॉ. पुरोहित
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजकीय डूंगर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार पुरोहित ने अपने संबोधन में कहा कि मृदा और पर्यावरण का संरक्षण आज वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा पर्यावरणीय जागरूकता के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने इस गंभीर विषय पर तत्परता दिखाने के लिए एनआरसीसी के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की।
वहीं, केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र कुमार ने तकनीकी सत्र में विद्यार्थियों को मृदा परीक्षण (Soil Testing), संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं नवीन वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के व्यावहारिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि भूमि की उर्वरा शक्ति को भी दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
युवाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी वैज्ञानिक तकनीक: निदेशक डॉ. पूनिया
एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्यम से प्रेषित अपने संदेश में कहा कि भारत सरकार का ‘खेत बचाओ अभियान’ मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं टिकाऊ व जैविक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनआरसीसी के वैज्ञानिक अब किसानों के साथ-साथ कॉलेज के युवाओं और छात्र-छात्राओं को भी इस मुहिम से जोड़ रहे हैं, ताकि वैज्ञानिक जानकारियों का व्यापक प्रसार हो सके और देश का अन्नदाता उन्नत तकनीकों से लाभान्वित हो सके।
इस दौरान डूंगर कॉलेज के हिंदी साहित्य विभागाध्यक्ष डॉ. अन्नाराम शर्मा ने विषय को सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में सनातन काल से ही भूमि को माता का स्वरूप मानकर उसकी पूजा की जाती रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी धरती माता, प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनने तथा समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित संकाय सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं ने इस पूरे सत्र को अत्यंत ज्ञानवर्धक, व्यावहारिक और समयानुकूल बताते हुए केंद्र के प्रति आभार प्रकट किया।


