बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल ने समान नागरिक संहिता पर सौंपे महत्वपूर्ण सुझाव
बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल ने समान नागरिक संहिता पर सौंपे महत्वपूर्ण सुझाव


“एक राष्ट्र–एक नागरिक कानून” को बताया ऐतिहासिक पहल, व्यापारिक स्थिरता और महिला सशक्तिकरण पर दिया जोर


बीकानेर, 2 जुलाई । बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल ने राजस्थान सरकार द्वारा गठित समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) समिति को एक विस्तृत सुझाव-पत्र प्रेषित किया है. व्यापार मंडल ने समान नागरिक संहिता का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे सामाजिक समरसता, न्याय, महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता तथा आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है.


व्यापार मंडल के अध्यक्ष जुगल राठी ने अपने सुझावों में रेखांकित किया कि समान नागरिक संहिता केवल विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का एकीकरण नहीं है, बल्कि यह संविधान में निहित समानता एवं न्याय के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से लागू करने का सशक्त माध्यम बन सकती है. उन्होंने कहा कि स्पष्ट एवं एकरूप नागरिक कानूनों से समाज के साथ-साथ देश के व्यापार एवं उद्योग जगत को भी नई स्थिरता एवं पारदर्शिता प्राप्त होगी.
सचिव संजय जैन सांड द्वारा समिति को दिए गए सुझावों में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं दत्तक ग्रहण संबंधी समान एवं सरल कानून लागू करने की वकालत की गई है. इसके साथ ही विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीकरण करने, सभी नागरिकों के लिए एक पति–एक पत्नी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण को लागू करने के लिए साल 2007 के कानून को और अधिक कठोर एवं प्रभावी बनाए जाने की अनुशंसा की गई है.
व्यापार मंडल के प्रतिनिधि साजिद सुलेमानी ने औद्योगिक सरोकारों को उठाते हुए कहा कि उत्तराधिकार संबंधी नए प्रावधान इतने स्पष्ट और व्यावहारिक होने चाहिए कि किसी पारिवारिक विवाद के कारण चल रहे व्यापार या उद्योग पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े तथा “बिज़नेस कंटिन्यूटी (Business Continuity)” बनी रहे. इसके लिए सिंगल विंडो डिजिटल सिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि पार्टनरशिप फर्म, एलएलपी (LLP), कंपनियों की शेयरहोल्डिंग एवं स्वामित्व संबंधी अभिलेखों में संशोधन की प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल, पेपरलेस, सरल एवं समयबद्ध हो सके.
ज्ञापन में वैवाहिक एवं पारिवारिक कानूनों के दुरुपयोग को रोकने हेतु झूठे मामलों में दंडात्मक प्रावधान करने, पारिवारिक विवादों में अनिवार्य मध्यस्थता (Family Mediation) लागू करने, तथा स्वामित्व परिवर्तन की प्रक्रियाओं को Ease of Doing Business के अनुरूप सरल बनाने की भी पुरजोर सिफारिश की गई है. मंडल ने यह भी सुझाव दिया कि यूसीसी (UCC) में नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों का भी स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए.
बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल ने अपने ज्ञापन में यह विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार “एक राष्ट्र–एक कर (GST)” ने देश की कर व्यवस्था को सरल एवं एकीकृत बनाया है, उसी प्रकार “एक राष्ट्र–एक नागरिक कानून” न्यायिक व्यवस्था में समानता, पारदर्शिता एवं राष्ट्रीय एकीकरण को और अधिक मजबूत करेगा. मंडल द्वारा यह महत्वपूर्ण ज्ञापन समान नागरिक संहिता समिति के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री, मुख्य सचिव, जिला कलक्टर, संभागीय आयुक्त, स्थानीय सांसद और विधायकों को भी प्रेषित किया गया है.


