बीकानेर में डॉ. नमामीबीकानेरशंकर आचार्य के राजस्थानी लघुकथा संग्रह ‘उतर-पातर’ का भव्य लोकार्पण


7बीकानेर,7 जुलाई। राजस्थानी साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण में, जाने-माने साहित्यकार डॉ. नमामीशंकर आचार्य के नवीन राजस्थानी लघुकथा संग्रह ‘उतर-पातर’ का भव्य लोकार्पण रविवार को महाराजा नरेन्द्र सिंह ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। पारायण फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस साहित्यिक समारोह में कला, शिक्षा और साहित्य जगत की कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की और कृति की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी अकादमी, बीकानेर के पूर्व सचिव डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य ने कहा कि ‘उतर-पातर’ संग्रह में राजस्थानी के पुराने और मूल शब्दों का उपयोग कर भाषा के मूल स्वरूप को संरक्षित करने का एक बेहद सराहनीय और महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि जीवन के विभिन्न पक्षों को छूती ये लघुकथाएं पाठकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाएंगी।
वरिष्ठ साहित्यकार और साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के पूर्व संयोजक मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि डॉ. नमामी ने इस संग्रह में समय के अनुकूल नए प्रयोग करते हुए राजस्थानी लघुकथा लेखन को एक नई दिशा देने का सफल प्रयास किया है। लुप्त हो रहे ठेठ राजस्थानी शब्दों को पुनः मुख्यधारा की भाषा में स्थापित करना इस कृति की बड़ी विशेषता है।
समारोह के मुख्य अतिथि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आचार्य मनोज दीक्षित ने राजस्थानी भाषा की व्यापकता पर बल देते हुए कहा कि यह करोड़ों लोगों की जुबान है और इसे इसका उचित सम्मान व संवैधानिक अधिकार मिलना ही चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि वे वहां राजस्थानी विभाग खोलने के लिए पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित हैं।
लोकार्पित कृति पर पत्र वाचन करते हुए कवि, नाटककार और पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने ‘उतर-पातर’ की साहित्यिक गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस संग्रह की लघुकथाएं सृजन की हर कसौटी पर खरी उतरती हैं। इनमें गहरे जीवन अनुभवों के साथ-साथ समकालीन समाज और समय की विकृतियों व विसंगतियों पर बिना किसी हिचक के करारा प्रहार किया गया है।
इससे पूर्व, स्वागत भाषण देते हुए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक व कवि डॉ. हरिशंकर आचार्य ने कहा कि लेखक के जीवंत अनुभवों और अनुभूतियों ने ही समाज की कड़वी और सच्ची वास्तविकता से रूबरू कराने वाली इन लघुकथाओं का आकार लिया है, जिसका साहित्य जगत को खुले मन से स्वागत करना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक और कवि-पत्रकार संजय आचार्य वरुण ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रचनाकार समाज में घटने वाली घटनाओं को ही अपनी रचनात्मकता में ढालता है। यह संग्रह राजस्थानी में स्तरीय गद्य लेखन की कमी को बखूबी पूरा करता है।


अपनी रचना पर बात करते हुए स्वयं कथाकार डॉ. नमामीशंकर आचार्य ने बेहद आत्मीयता से कहा, “एक मनुष्य के नाते समय और समाज से मुझे जो कुछ भी अनुभव मिले हैं, मैंने इस संग्रह के माध्यम से केवल उन्हें ही अभिव्यक्त करने की कोशिश की है। ये लघुकथाएं जीवन की कुछ वास्तविकताओं के ऊपर से पर्दा हटाकर सच देखने और दिखाने का एक छोटा सा प्रयास हैं।” उन्होंने जोड़ा कि संवेदनाएं हर इंसान के भीतर सोई होती हैं, लेकिन एक लेखक के भीतर वे रचनाबोध बनकर प्रकट हो जाती हैं।
बेसिक पी जी महाविद्यालय के निदेशक रामजी व्यास ने डॉ. नमामीशंकर को राजस्थानी भाषा का एक सच्चा और निष्ठावान सिपाही बताया। उन्होंने साझा किया कि लेखक के विशेष आग्रह और प्रेरणा से ही उनके महाविद्यालय में राजस्थानी विभाग की स्थापना संभव हो सकी है। व्यास ने उम्मीद जताई कि वे अपने सतत लेखन से बीकानेर और पूरे राजस्थान का नाम लगातार रोशन करते रहेंगे। इस अवसर पर साहित्यकार सुरेश सोनी ने बड़े ही अनूठे अंदाज में चंपू शैली (गद्य-पद्य मिश्रित) में लेखक का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया।
समारोह में बीकानेर के साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्र के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें साहित्यकार कमल रंगा, राजेन्द्र जोशी, राजाराम स्वर्णकार, शंकरसिंह राजपुरोहित, शिक्षाविद विजयशंकर आचार्य, डॉ. सुधा आचार्य, याकूब भाटी, कौसर भुट्टो, शायर इरशाद अज़ीज़, क़ासिम बीकानेरी, वली मोहम्मद ग़ौरी, जाकिर अदीब, प्रमोद कुमार शर्मा, आकाशवाणी के अमित सिंह, महेश उपाध्याय, मनीष कुमार जोशी, चित्रकार योगेन्द्र पुरोहित, सिद्धार्थ जोशी, डॉ. नासिर ज़ैदी, अब्दुल शकूर सिसोदिया, मनीषा आर्य सोनी, आत्माराम भाटी, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, हरिकिशन व्यास, विनीता शर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, सुधा सारस्वत, भावना आचार्य, भास्कर आचार्य, डॉ. चन्द्रशेखर श्रीमाली, डॉ. मुकेश हर्ष, विप्लव व्यास, एडवोकेट इसरार हसन कादरी, डॉ. अजय जोशी, राजेन्द्र स्वर्णकार, डॉ. फारूक़ चौहान, शिवराज भारतीय, गिरीश पुरोहित, पेंटर पी. राज, अजीत राज, छोटू खां, नगेन्द्र किराडू, बी डी हर्ष, श्याम सुंदर किराड़ू, कृपा शर्मा, हितेश पुरोहित, भूरमल सोनी, अमित गोस्वामी, दीवान दान रतनू, मधुसूदन सोनी सहित मोट्यार परिषद के हिमांशु टाक, प्रशांत जैन, राजेश चौधरी, राजेश कड़वासरा, कमल मारू, ब्रह्मकुमार गहलोत, सुनील विश्नोई और मोहित के. विश्नोई प्रमुख थे। कार्यक्रम के समापन पर सभी आगंतुकों के प्रति रामअवतार उपाध्याय ने आभार व्यक्त किया।




