मैत्री भावना से जीवन में सौहार्द एवं आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है: साध्वी चित्तलेहांजनाश्रीजी

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बीकानेर, 03 अगस्त । शहर के रांगड़ी चौक स्थित सुगनजी महाराज के उपाश्रय में विराजित पूज्य मुक्तांजना श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सान्निध्य में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला के तहत सोमवार को धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान साध्वी वृंद ने श्रद्धालुओं को मैत्री, करुणा और पारिवारिक समरसता का संदेश दिया।

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धर्मसभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य चित्तलेहांजनाश्रीजी महाराज साहब ने 14 भावनाओं में वर्णित ‘मैत्री भावना’ का आध्यात्मिक महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि संसार के सभी जीवों के प्रति मैत्री, करुणा एवं सद्भाव का भाव ही मनुष्य जीवन को शांति और आध्यात्मिक ऊंचाइयों की ओर ले जाता है। मैत्री भावना व्यक्ति के भीतर व्याप्त द्वेष, ईर्ष्या एवं वैमनस्य को समाप्त कर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

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वहीं, पूज्य मुक्तांजनाश्रीजी महाराज साहब ने ‘अमिचंद की अमी दृष्टि’ विषय पर सारगर्भित प्रवचन देते हुए पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि परिवार में किसी भी नई परिस्थिति के आगमन पर यदि धैर्य, त्याग और परस्पर सम्मान का भाव न हो, तो क्लेश और वाद-विवाद पनपते हैं। इसलिए परिवार के हर सदस्य को समझदारी और प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।

कलश स्थापना और अतिथियों का बहुमान
कार्यक्रम के दौरान “ॐ ह्रीं श्रीं अर्हम् नमः” जाप के कलश की स्थापना विधिवत संपन्न की गई। कलश स्थापना का लाभ गुप्त रहा, जबकि वासक्षेप भरने का सौभाग्य हेमराज छाजेड़ परिवार ने प्राप्त किया।

इस अवसर पर धर्मसभा में जोधपुर से पधारे सुरेंद्र मूथा का संघ की ओर से भावभीना बहुमान एवं अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में बीकानेर शहर के बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर चातुर्मासिक प्रवचनों का धर्मलाभ लिया।

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