पर्युषण महापर्व साधना से सिद्धि की ओर अग्रसर होने का एक महत्वपूर्ण अवसर

शिवमोग्गा में हुआ आध्यात्मिक वातावरण का संचार
क्विक जेप्स विज्ञापन 13 oct 2026
  • शिवमोग्गा में हुआ आध्यात्मिक वातावरण का संचार

शिवमोग्गा (कर्नाटक), 8 सितम्बर। आचार्य श्री महाश्रमणजी की अनुज्ञा से चेन्नई से पधारे उपासक स्वरूप चंद दाँती और धनराज मालू के मार्गदर्शन में तेरापंथ भवन, शिवमोग्गा में पर्युषण महापर्व का प्रथम दिवस ‘खाद्य संयम दिवस’ के रूप में मनाया गया।

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नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के उपरांत तेरापंथ महिला मंडल ने मंगलाचरण गीत प्रस्तुत किया। सभाध्यक्ष श्री उत्तमचन्द बरलोटा ने स्वागत भाषण दिया। महिला मंडल अध्यक्षा हेमलता बाफणा और तेयुप अध्यक्ष निखिल कोठारी ने पर्युषण महापर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए दोनों उपासकों का परिचय प्रस्तुत किया। लता कोठारी ने स्वागत समारोह का संचालन किया।

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उपासक श्री स्वरूप चंद दाँती ने कहा कि पर्युषण महापर्व साधना के माध्यम से सिद्धि की ओर अग्रसर होने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व व्रतों के द्वारा कर्म रूपी छिद्रों को भरने और अपनी त्रुटियों का प्रायश्चित कर आत्मोत्थान प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने माता मरुदेवा की घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान आदिनाथ के आभा-मंडल के प्रभाव से ही उन्होंने संसार सागर को पार कर सिद्धत्व प्राप्त किया। हमें भी सद्गुरु के आत्मप्रभाव में आकर अपने मूल स्वभाव में स्थित होने का प्रयास करना चाहिए।

उपासक श्री धनराज मालू ने कहा कि धर्म में प्रगति करने, संयम का पालन करने और साधना की सम्यक आराधना में खाद्य संयम का महत्वपूर्ण योगदान है। हमें हित (शरीर की परिस्थिति के अनुसार), मित (भूख से कम) और रीत (पवित्र एवं प्रसन्न भावों से) भोजन करना चाहिए।

अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने प्रथम दिवस पर उपवास, एकाशन आदि संकल्पों को स्वीकार किया। प्रातःकालीन प्रार्थना, मुख्य प्रवचन, सायंकालीन प्रतिक्रमण और रात्रिकालीन प्रवचन में श्रावक समाज ने सक्रिय भागीदारी निभाकर कर्म निर्जरा में गतिशीलता प्राप्त की।

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