बागेश्वर बाबा के बयान पर बंगाल में घमासान

बागेश्वर बाबा के बयान पर बंगाल में घमासान
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  • शुभेंदु ने मां काली का ‘मछली भोग’ खाकर दिया जवाब

कोलकाता ,11 सितम्बर । दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन के प्रयोग पर बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल में छिड़ा राजनीतिक व सांस्कृतिक विवाद गहरा गया है। इस बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने प्रसिद्ध कालीघाट काली मंदिर में मां काली को अर्पित किया गया पारंपरिक मछली का महाप्रसाद ग्रहण कर पलटवार किया है। उन्होंने व्यक्तिगत मान्यताओं और बंगाल की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के अंतर को रेखांकित करते हुए मामले को शांत करने का प्रयास किया।

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कौशिकी अमावस्या पर ग्रहण किया विशेष महाप्रसाद

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कालीघाट मंदिर में दर्शन: कौशिकी अमावस्या के पावन अवसर पर शुभेंदु अधिकारी संध्या समय कालीघाट मंदिर पहुंचे और मां काली की विधिवत पूजा-अर्चना की।
पारंपरिक महाप्रसाद: पूजा के उपरांत उन्होंने मंदिर परिसर में बैठकर बसंती पुलाव, मछली का मूरा और तली हुई मछली का प्रसाद ग्रहण किया।

व्यक्तिगत राय की सीमा: पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने केवल अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त की थी, जिसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।

संतों के विचार और बंगाल की परंपरा पर रुखधार्मिक स्वतंत्रता और परंपरा

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि किसी भी संत को अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन जनता उसे मानने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं व्यक्तिगत जीवन में सात्विक आहार का पालन करते हैं, लेकिन बंगाल की शाक्त परंपरा में मां काली को मछली का भोग अर्पित करने की पौराणिक प्रथा रही है।

तस्वीरें जलाने वालों पर कार्रवाई की मांग

इससे पूर्व विधानसभा सत्र में उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को भवानीपुर पुलिस स्टेशन के बाहर कथावाचक की तस्वीरें जलाने वाले उपद्रवियों को तुरंत गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तुष्टीकरण की राजनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने भी बंगाल की विविध खान-पान परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बताने का प्रयास किया है, वहीं विरोधी दलों द्वारा विरोध प्रदर्शन जारी है। कौशिकी अमावस्या पर शुभेंदु अधिकारी द्वारा कालीघाट में मछली का भोग ग्रहण किए जाने का कदम इस समय पूरे राज्य में राजनीतिक एवं सामाजिक चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।

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