गंगाशहर में श्रीमती संगीता बोथरा का मासखमण तप अभिनंदन, साध्वी त्रिशलाकुमारी ने कहा- तप की शक्ति अचिंत्य
गंगाशहर में श्रीमती संगीता बोथरा का मासखमण तप अभिनंदन, साध्वी त्रिशलाकुमारी ने कहा- तप की शक्ति अचिंत्य



गंगाशहर, 26 सितम्बर । श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी के सान्निध्य में श्रीमती संगीता बोथरा के मासखमण तप का अभिनंदन कार्यक्रम नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के साथ आयोजित किया गया।


समारोह को संबोधित करते हुए साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी ने कहा कि जिस प्रकार पुष्प की कली में सुगंध और गन्ने में मिठास होती है, उसी प्रकार जैन धर्म के चिंतन में तप समाहित है। उन्होंने कहा कि साबुन से वस्त्र और शरीर की शुद्धि होती है, जबकि तपस्या से जन्म-जन्मांतरों के गाढ़े कर्मों की निर्जरा होती है। तप की अचिंत्य शक्ति से असाध्य रोगों तक का निवारण संभव है। उन्होंने संगीता बोथरा के मनोबल की सराहना करते हुए कहा कि रसनेन्द्रिय पर संयम स्थापित कर मासखमण जैसी कठिन तपस्या करना अद्भुत एवं प्रेरणादायी है।


कार्यक्रम में साध्वीश्री रश्मिप्रभा जी ने तप अनुमोदना गीतिका की प्रस्तुति दी, जबकि संचालन साध्वीश्री कल्पयशा जी ने किया। सभा अध्यक्ष नवरतन बोथरा ने साध्वी प्रमुखा श्री जी का संदेश वाचन किया। इस दौरान वरिष्ठ श्रावक जैन लूणकरण छाजेड़ ने संगीता बोथरा का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए तप की अनुमोदना करते हुए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
समारोह में तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष प्रेम बोथरा, तेयुप के पूर्व मंत्री मांगीलाल बोथरा, सभा मंत्री जतन संचेती तथा धीरेन्द्र बोथरा ने विचार व्यक्त करते हुए तपस्वी बहन के प्रति मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। इस अवसर पर पारिवारिक सदस्यों ने सामूहिक गीत का संगान किया।
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