मनुस्मृति पर दो दिवसीय विचार गोष्ठी का समापन

मनुस्मृति पर दो दिवसीय विचार गोष्ठी का समापन
quicjZaps 15 sept 2025
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी हो एक सीमा’, प्रबुद्ध वक्ताओं ने व्यक्त किए विचार

बीकानेर, 04 अक्टूबर । पर्यावरण पोषण यज्ञ समिति के तत्वावधान में आयोजित “मनुस्मृति समर्थन या विरोध कितना उचित?” विषयक दो दिवसीय विचार गोष्ठी के अंतिम दिन रविवार को तृतीय एवं चतुर्थ सत्र में प्रबुद्ध वक्ताओं ने पक्ष-विपक्ष में अपने विचार रखे। वक्ताओं ने मनुस्मृति को धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं दंडशास्त्र का समावेश बताते हुए कहा कि किसी भी विचार या ग्रंथ की विवेचना देश, काल और परिस्थिति के अनुसार ही की जानी चाहिए।

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा पर मंथन

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संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर आज समाज में कुछ भी कहने की छूट देना उचित नहीं है। अभिव्यक्ति की भी एक सीमा होनी चाहिए, जिससे समाज का अहित न हो। मनुस्मृति में वर्ण व विशेषज्ञता के आधार पर अभिव्यक्ति का अधिकार शिक्षा व संस्कारों के प्रसार हेतु दिया गया था। परंतु आज के दौर में स्वतंत्रता के नाम पर जो परोसा जा रहा है, वह युवा पीढ़ी के लिए कितना उपयुक्त है, इस पर गंभीर विचार करने की आवश्यकता है।

संविधान और मनुस्मृति का तुलनात्मक दृष्टिकोण

सत्र में इस बात पर भी चर्चा हुई कि जो मनुस्मृति का समर्थन करते हैं, क्या वे इसे 100% मानते हैं, और जो विरोध करते हैं, क्या वे 100% विरोध में हैं? विपक्ष का मत था कि जब भारतीय संविधान समानता का अधिकार देता है तो प्राचीन ग्रंथों की ओर लौटना कितना प्रासंगिक है। वहीं, वक्ताओं ने स्त्री शिक्षा, समाज में महिलाओं की स्थिति, मर्यादा तथा पर्यावरण व प्रदूषण के संदर्भ में मनुस्मृति के व्यावहारिक संदेशों को आमजन तक पहुंचाने की बात कही ताकि भ्रांतियों को दूर किया जा सके।

प्रमुख वक्ताओं की उपस्थिति व श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता आचार्य रविंद्र ने तथा संचालन आचार्य शिवनाथ ने किया। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुरेंद्र कुमार ने की एवं संचालन डॉ. दीपक आर्य ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर शत्रुंजय, डॉ. पुनीत चोपड़ा, ऋतु शर्मा, आचार्य रवि शंकर, आचार्या शीतल, मुनि सत्यजीत, आचार्य रविंद्र एवं आचार्य डॉ. निरंजन लाल ने विचार रखे। इस अवसर पर शिक्षाविद स्वर्गीय रामनारायण स्वामी की स्मृति में उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

कार्यक्रम के अंत में सत्संग एवं भजन संध्या का आयोजन हुआ। तत्पश्चात आर्ष न्यास एवं वैदिक शोध संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा पधारे हुए विद्वानों का सम्मान कर धन्यवाद ज्ञापित किया गया।