प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी को बड़ा झटका, विधान परिषद की दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी की शानदार जीत
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी को बड़ा झटका, विधान परिषद की दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी की शानदार जीत

वाराणसी, 29 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनावों के आए परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। वाराणसी खंड की स्नातक (Graduate) और शिक्षक (Teacher)—दोनों ही महत्वपूर्ण सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP) के उम्मीदवारों ने कब्जा जमा लिया है। प्रधानमंत्री के गढ़ में भाजपा का दोनों सीटों पर हार जाना पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।


वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम एक नजर में



वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: इस सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार लाल बिहारी यादव ने शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को पराजित किया। लाल बिहारी यादव ने प्रथम और द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती के बाद स्पष्ट बढ़त बनाते हुए जीत हासिल की।
वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: इस सीट पर भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने बाजी मार ली है। उन्होंने कड़े मुकाबले के बाद भाजपा के उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को लगभग 18,450 से अधिक मतों के अंतर से हराया। हार के बाद भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी हार स्वीकार की।
मतगणना और कड़ी सुरक्षा के बीच आए नतीजे
वाराणसी के पहड़िया स्थित लाल बहादुर शास्त्री नवीन मंडी स्थल पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वोटों की गिनती संपन्न हुई। मतगणना के दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल सहित तमाम बड़े अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। परिणामों की घोषणा के साथ ही समाजवादी पार्टी के खेमे में जश्न का माहौल शुरू हो गया और कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़े बजाकर अपनी जीत का जश्न मनाया।
राजनीतिक मायने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घरेलू राजनीतिक क्षेत्र में भाजपा का इस तरह दोनों विधान परिषद सीटों से हाथ धोना आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षकों और स्नातकों के बीच पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसे स्थानीय और सेवा से जुड़े मुद्दे हावी रहे, जिसके चलते मतदाताओं ने सत्ताधारी दल के खिलाफ मतदान किया।

