एसपीएमसी की नई बिल्डिंग में एसी खराब, हाथ के पंखे का सहारा लेने को मजबूर भावी डॉक्टर्स

एसपीएमसी की नई बिल्डिंग में एसी खराब, हाथ के पंखे का सहारा लेने को मजबूर भावी डॉक्टर्स
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर की भीषण गर्मी में मेडिकल छात्रों की परीक्षा

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बीकानेर, 21 मई। राजस्थान के बीकानेर संभाग में इन दिनों सूरज की तपिश और लू (Heatwave) के थपेड़ों ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ पारा 45 डिग्री के करीब बना हुआ है, वहीं देश के प्रतिष्ठित सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज (SPMC) से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ नई कॉलेज बिल्डिंग के लेक्चर थिएटर में एयर कंडीशनर (AC) खराब होने के कारण एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को भीषण गर्मी में पढ़ाई करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

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हाथ के पंखे से पढ़ाई करने की नौबत
मामला तब प्रकाश में आया जब एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र मानस बिन्नाणी ने कॉलेज में गर्मी से बेहाल होकर अपने परिजनों से ‘हाथ से चलने वाले’ प्लास्टिक के पंखे की मांग की। छात्र के दादा और शहर के प्रतिष्ठित नागरिक गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।

अभिभावकों का कहना है कि जब छात्र से पूछा गया तो पता चला कि नई कॉलेज बिल्डिंग के अनैटमी लेक्चर थिएटर (LT-5) में तीन एसी लगे हुए हैं, लेकिन पिछले 15 दिनों से उनमें से केवल एक ही चालू हालत में है। बाकी दो एसी बंद पड़े हैं और पंखे भी या तो खराब हैं या फिर इस प्रचण्ड गर्मी में केवल गर्म हवा ही फेंक रहे हैं।

15 दिनों से ठप पड़ी व्यवस्था, पढ़ाई पर पड़ रहा असर
बीकानेर की गर्मी में जहाँ साधारण कमरों में बैठना दूभर है, वहाँ बिना एसी के लेक्चर थिएटर में बैठकर घंटों पढ़ाई करना छात्रों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। अभिभावकों ने तर्क दिया है कि अत्यधिक पसीने और उमस के कारण छात्र लंबे समय तक पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। मेडिकल जैसे गहन विषय की पढ़ाई के लिए शांत और अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है, लेकिन यहाँ व्यवस्थाएं इसके विपरीत नजर आ रही हैं।

प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग
गोवर्द्धन दास बिन्नाणी ने कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से निवेदन किया है कि बिना किसी विलंब के लेक्चर थिएटर (LT-5) के सभी एसी ठीक करवाए जाएं। उन्होंने मांग की है कि पूरे गर्मी के मौसम में एसी और पंखों के सुचारू संचालन के लिए एक स्थाई मैकेनिज्म तैयार किया जाए ताकि भविष्य के डॉक्टरों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।

शहर के बुद्धिजीवियों का भी मानना है कि जब सरकार और मेडिकल कॉलेज प्रशासन बुनियादी ढांचे पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, तो रखरखाव (Maintenance) के अभाव में छात्रों को इस तरह की परेशानी उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है। अब देखना यह है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस शिकायत पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है।

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