बीकानेर सेंट्रल जेल के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही से तस्कर रिहा

बीकानेर सेंट्रल जेल में हिंसक झड़प में विचाराधीन बंदियों में मारपीट
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  • बीकानेर सेंट्रल-जेल से छोड़े तस्कर को ढूंढ रही है पुलिस:एक मामले में मिली थी जमानत; जल्दबाजी में रिहा किया, जेलर बोले-वारंट बाद में मिला था

बीकानेर , 6 दिसम्बर। बीकानेर सेंट्रल जेल के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां जेल में बंद एक तस्कर को जेल प्रशासन ने छोड़ दिया। जबकि उसे हत्या मामले में आर्म्स एक्ट में जमानत मिली थी।मामला गुरुवार सुबह का है। इधर, जेल प्रशासन को जब इसकी खबर मिली तो हड़कंप मच गया। अब पुलिस आरोपी उड़सर गांव निवासी मदनलाल खींचड की तलाश कर रही है। वहीं जेलर रामप्रताप का दावा है कि उन्हें वारंट बाद ​में मिला था और जमानत के कागज पहले आ गए थे। वहीं इस मामले में लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है।

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तीन साल की सुनाई थी सजा, गुरुवार को मिली थी जमानत

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जेल अ​धीक्षक सुमन मालीवाल ने बताया कि नोखा के उड़सर गांव निवासी मदनलाल खींचड़ हत्या के मामले में बंद था। एक हत्याकांड में हथियार उपलब्ध कराने के आरोप में उसे तीन साल की सजा सुनाई थी। बुधवार को बीकानेर कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई थी। इस पर उसे जमानत मिल गई। जमानत से जुड़े कागज जेल में पहुंचे तो जेल प्रशासन की की ओर से उसे छोड़ दिया।बाद में जब वारंट मिला तो सामने आया कि इस सजा से पहले वह एनडीपीएस एक्ट मामले में अब भी दोषी है और सजा काट रहा है। मदनलाल की रिहाई के बाद जेल प्रशासन को ध्यान में आया कि तस्करी के मामले में उसे जेल में ही रखना था।

अब ढूंढ रहे है मदनलाल को

जेल अधीक्षक सुमन मालीवाल ने गुरुवार को इस बारे में पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सिंह सागर को जानकारी दी थी। इसके जिसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही है। मूल रूप से नोखा के रहने वाले मदनलाल को पुलिस के साथ जेल पुलिस भी ढूंढ रही है। वहीं जेलर रामप्रताप ने दैनिक भास्कर को बताया कि एनडीपीएस एक्ट के जिस मामले में उसे जेल में रखा जाना था, उसका वारंट बाद में मिला था। जबकि जमानत के कागज पहले मिल गए थे। इसी कारण उसे रिहा कर दिया गया। अब वापस पकड़कर जेल में बंद किया जाएगा।

ये था मामला, आरोपी के खिलाफ 16 मामले दर्ज

2 अगस्त 2007 को नोखा के घट्टू निवासी प्रभुराम पुत्र रामरख बिश्नोई ने नोखा थाने में रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया कि गया उसके और राधाकिशन के बीच में जमीन विवाद चल रहा है। वह जब अपने भाई ताराचंद और भाभी धूड़ी के साथ खेत पर जा रहे थे। इसी दौरान राधाकिशन, रामकिशोर, जयसुखराम, रामेश्वर,भागीरथ,गंगाजल, पप्पूराम, मुन्नीराम और राधाकिशन का बहनोई मदनलाल आए। इनके पास बरछी, लाठी और हथियार थे। आरोपियों ने जानलेवा हमला किया, ​जिसमें उसके भाई ताराचंद की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने 31 गवाह और 28 डॉक्युमें पेश किए थे। इसी मामले में मदनलाल को आर्म्स एक्ट में तीन साल की सजा हुई थी।

आरोपी मदनलाल के खिलाफ विभिन्न पुलिस थानों में 16 मामले दर्ज है। वह बीकानेर के जसरासर थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है। पुलिस ने 13 जून 2024 को एक अन्य आरोपी सांवरमल के साथ गिरफ्तार किया था। इनके पास करीब 15 ग्राम एमडी बरामद हुई थी। इसी एनडीपीएस मामले में वह सेंट्रल जेल में बंद था।

दोषी पर होगी कार्रवाई
जेल अधीक्षक सुमन मालीवाल ने इस बारे में मीडिया से कहा कि हम पूरे मामले की छानबीन कर रहे हैं कि वो बंदी को रिलीज कैसे कर दिया गया? इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इधर, सेंट्रल जेल के इस लापरहवाही के बाद अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे है।

 

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