बीकानेर के सरकारी समाचार
बीकानेर के सरकारी समाचार


- जिला कलेक्टर ने बरसिंहसर में की जनसुनवाई, आंगनबाड़ी केंद्र का किया निरीक्षण
- त्रिस्तरीय जनसुनवाई महत्त्वपूर्ण – जिला कलेक्टर
बीकानेर, 4 जून। जिला कलेक्टर निशांत जैन ने गुरुवार को बरसिंहसर में आयोजित ग्राम पंचायत स्तरीय जनसुनवाई में भागीदारी निभाई तथा आमजन के परिवाद सुने।
इस दौरान जिला कलेक्टर ने कहा कि राज्य सरकार के निर्देश पर जिले में भी जनसुनवाई की त्रिस्तरीय व्यवस्था की गई है। आमजन को इसके माध्यम से अधिक से अधिक राहत मिले, इसके मद्देनजर सभी अधिकारी पूर्ण गंभीरता और जिम्मेदारी से कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें।


जनसुनवाई के दौरान पानी, बिजली सड़क और राजस्व से जुड़े 14 प्रकरण प्राप्त हुए। इनमें से चार प्रकरणों का मौके पर निस्तारण कर दिया गया। शेष प्रकरणों के संबंध में त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए गए।


वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान की दी जानकारी
जिला कलेक्टर ने ग्रामीणों को ‘वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान की जानकारी दी और बताया कि 12 दिवसीय अभियान के तहत जिले के लाखों लोगों को जल संरक्षण और इसके समुचित उपयोग के लिए प्रेरित किया गया है। उन्होंने हरियालो राजस्थान और एक पेड़ मां के नाम अभियान की जानकारी दी तथा पौधारोपण भी किया। जिला कलेक्टर ने कहा कि किसान भी बूंद-बूंद पानी का समुचित उपयोग करें तथा कृषि की नई तकनीकों का उपयोग करते हुए अधिक से अधिक मुनाफा कमाएं।
बेटी जन्मोत्सव और एकल बेटी सम्मान में निभाई भागीदारी
जिला कलेक्टर ने बरसिंहसर के की आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। यहां बच्चों तथा गर्भवती माताओं दी जाने वाली सेवाओं की जानकारी ली तथा सभी व्यवस्थाएं नॉर्म्स के अनुसार प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने बेटी जन्मोत्सव, एकल बेटी सम्मान और गोद भराई रस्म में भागीदारी निभाई और कहा कि आज बेटियां, प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बेटियों को आगे बढ़ने के भरपूर अवसर दें। जिला कलेक्टर ने यहां मौजूद महिलाओं से व्यवस्था संबंधी फीडबैक लिया।
इस दौरान उपखंड अधिकारी सुश्री महिमा कसाना, प्रशिक्षु आईएएस मनु गर्ग, तहसीलदार नीतीश कांत, प्रचेता श्रीमती विजय लक्ष्मी जोशी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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वंदे गंगा अभियान के तहत वन विभाग ने किया ‘रन फॉर एनवायरमेंट’ जागरूकता दौड़ का आयोजन
प्रतिभागियों को किया गया पौधों का निशुल्क वितरण
बीकानेर, 4 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा गुरुवार को वंदे गंगा पखवाड़ा अभियान के अंतर्गत ‘रन फॉर एनवायरमेंट’ का आयोजन किया गया। ‘रन फॉर एनवायरमेंट’ जागरूकता दौड़ को हरी झंडी सुबह करीब साढ़े सात बजे मुख्य वन संरक्षक हनुमानाराम, निगम कमिश्नर सिद्धार्थ पलानीचामी, एसडीएम बीकानेर आईएएस सुश्री महिमा कसाना, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी राजकुमार मीणा व बीकानेर रन क्लब के ईशान शर्मा ने संयुक्त रूप से दिखाई।
रन का आयोजन उपवन संरक्षक कार्यालय पब्लिक पार्क से कलेक्ट्रेट होते हुए संभागीय आयुक्त कार्यालय, म्यूजियम सर्किल से सर्किट हाउस होते हुए पब्लिक पार्क उपवन संरक्षक कार्यालय तक किया गया। रन से पहले उपवन संरक्षक कार्यालय परिसर में प्रतिभागियों को मुख्य वन संरक्षक हनुमानाराम ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता तथा पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूकता की शपथ दिलाई। कार्यक्रम का आयोजन वन विभाग द्वारा बीकानेर रन क्लब एवं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सहयोग से किया गया।
उप वन संरक्षक जी. वेंकटेश ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने, वर्षा जल के संरक्षण तथा आमजन में प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से इस दौड़ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता तथा पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूक करना था।
निगम कमिश्नर सिद्धार्थ पलानीचामी ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। रन फॉर एनवायरमेंट के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, खेल संगठनों तथा आम नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।
दौड़ के दौरान प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली तथा हरित विकास से जुड़े संदेश भी दिए गए। कार्यक्रम के समापन पर वन विभाग द्वारा प्रतिभागियों एवं आमजन को निःशुल्क पौधों का वितरण किया गया। इस दौरान लोगों को अधिकाधिक पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने की सतत प्रक्रिया है। प्रतिभागियों ने भी पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
इस अवसर पर उप वन संरक्षक वन्य जीव श्री संदीप छालानी, सहायक वन संरक्षक सत्यपाल सिंह, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सहायक अभियंता गिरीश व्यास, कनिष्ठ अभियंता श्रीमती ज्योति मेव, राधेश्याम स्वामी, वन विभाग के रेंजर साऊथ महेश जाखड़, उत्तर रेंज के रेंजर महावीर रुहिल, वनपाल, सहायक वनपाल, वनरक्षक समेत बड़ी संख्या वनकर्मी, बड़ी संख्या में बीकानेर रन क्लब के सदस्यों समेत जिले के नागरिकों, विद्यार्थियों, पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों एवं युवा वर्ग ने इस जन-जागरूकता अभियान में अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
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कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्था का सांझा प्रयास: ‘खेत बचाओ अभियान’
30 जून तक ग्राम स्तर पर किसानों से करेंगे संवाद
बीकानेर, 4 जून। कृषि आयुक्तालय से प्राप्त निर्देशानुसार कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थान संयुक्त रूप से ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम के तहत 30 जून तक ग्राम स्तर गोष्ठी का आयोजन करेगा। इस दौरान किसानों से संवाद किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन 1 जून से प्रारम्भ हो चुका है।
कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र बीकानेर तथा लूणकरनसर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थान के इंस्टीट्यूट ‘खेत बचाओ अभियान’ में सक्रिय भूमिका में हैं।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) श्री मदनलाल ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में खेत की मिट्टी को स्वस्थ बनाने एवं संतुलित पोषण प्रबंध नितांत आवश्यक है। खाद एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग द्वारा उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
‘स्वस्थ मिट्टी, संरक्षित पानी और जागरूक किसान’ यही समृद्ध खेती की पहचान है। कृषकों की रासायनिक खाद पर निर्भरता को कम करने, स्वयं के खेत पर निर्मित जैविक आदानों व विधियों को अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने, पारम्परिक एवं उन्नत विधियों के समन्वित उपयोग को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार 30 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान’ संचालित किया जा रहा है। अभियान के क्रियान्वयन के लिए संबंधित सहायक कृषि अधिकारी नोडल अधिकारी नियुक्त किये गए हैं। कृषि विभाग अधिकारी, केवीके व आईसीएआर संस्थान के वैज्ञानिक किसानों से विस्तृत चर्चा करेंगे।
सहायक निदेशक (उद्यान) मुकेश गहलोत ने बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत आयोजित कृषक गोष्ठियों में ‘खेत बचाओ अभियान परिचय, उद्देश्य पर चर्चा के साथ -साथ ‘खेत बचाओ अभियान’ में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढावा देने, मिट्टी परीक्षण एवं इसके अनुनयन को प्रोत्साहन देने, जल संरक्षण एवं कुशलतम उपयोग को बढ़ावा देने, उपयुक्त फसल सुरक्षा अपनाने व समन्वित कृषि प्रबन्धन एवं उपयुक्त फसल चक्र, कृषि मशीनरी का सही उपयोग तथा कृषि उद्यानकी विभाग की योजनाओं की जानकारी प्रमुखता से किसानों को दी जाएगी।
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मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने एसबीआई-आरसेटी में किया प्रशिक्षण कार्यक्रम का अवलोकन
बीकानेर, 4 जून। ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का जायजा लेने के लिए जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती शैलजा पांडे ने गुरुवार को एसबीआई आरसेटी संस्थान का निरीक्षण किया।
उन्होंने संस्थान में संचालित विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण गतिविधियों का अवलोकन किया तथा प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर उनके अनुभवों की जानकारी प्राप्त की।
संस्थान निदेशक श्री रूपेश शर्मा ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी का स्वागत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा भविष्य की कार्ययोजना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसबीआई-आरसेटी ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को विभिन्न रोजगारोन्मुखी एवं स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य कर रहा है। संस्थान द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर अनेक लाभार्थी स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) श्री लक्ष्मण राम मोडासिया ने प्रशिक्षणार्थियों को बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल भुगतान प्रणाली तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने स्वरोजगार स्थापित करने के लिए उपलब्ध ऋण सुविधाओं एवं वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रशिक्षणार्थियों को प्रेरित किया।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती शैलजा पांडे ने संस्थान द्वारा किए जा रहे कौशल विकास एवं स्वरोजगार प्रोत्साहन कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण का पूर्ण लाभ लेकर अपने कौशल का उपयोग स्वरोजगार एवं रोजगार के अवसरों के सृजन में करने का आह्वान किया।
दौरे के दौरान एसीईओ श्री दिलीप कुमार सहित संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने सहभागिता निभाई।
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अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों से ऋण के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित
बीकानेर, 4 जून। राजस्थान अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास सहकारी निगम लिमिटेड द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिम, जैन, सिख, ईसाई, पारसी एवं बौद्ध) के जरूरतमंद व्यक्तियों को वर्ष 2026-27 के लिए कारोबारी ऋण के लिए आमंत्रित किए गए हैं।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी श्री राजेश कुमार कालवा ने बताया कि कारोबारी ऋण के तहत जनरल स्टोर टैण्ट हाउस, भोजनालय, टेलरिंग, मोटर बाईडिंग तथा ऋण के तहत एम.बी.बी.एस, बी.एस.सी., नर्सिंग आदि के लिए ऋण देने के लिए ऑन लाईन आवेदन आमंत्रित किए हैं।
उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्ति 5 जून से 15 जून 2026 तक मिलन सॉफ्टवेयर के लिए “https://milannmdfc.org” द्वारा ऑन लाईन आवेदन कर सकते है। उन्होंने बताया कि ऋण आवेदन संबंधी विस्तृत जानकारी के लिए विभाग की वेब साईट www.minorityaffairsrajasthan.gov.in या चौपड़ा कटला रानी बाजार स्थित कार्यालय जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय में व्यक्तिगत या दूरभाष नम्बर 0151-2201008 पर सम्पर्क कर प्राप्त कर सकते हैं।
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मानसून पूर्व तैयारियों संबंधी बैठक 8 जून को
बीकानेर, 4 जून। मानसून-2026 पूर्व व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए जिला कलेक्टर श्री निशांत जैन की अध्यक्षता में 8 जून को सायं 4.30 बजे जिला कलक्टर सभागार में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) एवं प्रभारी अधिकारी (सहायता) श्री उम्मेद सिंह रतनू ने आदेश जारी कर संबंधित सभी विभागों को मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाली संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए अपने-अपने विभागों का कंटीजेंसी प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में मानसून पूर्व की तैयारियों, राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं, जल निकासी, आपदा प्रबंधन संसाधनों की उपलब्धता तथा विभिन्न विभागों के समन्वय की समीक्षा की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियों के साथ आवश्यक रूप से बैठक में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
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महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय का 23वां स्थापना दिवस 7 जून को
पीएम-उषा योजना के भवनों का होगा लोकार्पण
बीकानेर, 4 जून। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय का 23वां स्थापना दिवस समारोह 7 जून रविवार को प्रातः 11 बजे आयोजित किया जाएगा। स्थापना दिवस के अवसर पर पीएम-उषा योजना के अंतर्गत निर्मित भवनों का ऑनलाइन लोकार्पण किया जाएगा।
ऑनलाइन समारोह की अध्यक्षता राजस्थान के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे करेंगे। कार्यक्रम में भारत सरकार के केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल तथा राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कार्यक्रम में बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास, बीकानेर पूर्व विधायक सुश्री सिद्धि कुमारी, श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत तथा विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
समारोह का आयोजन महर्षि शौनक भवन, कुलगुरु सचिवालय, विश्वविद्यालय परिसर में होगा। इस दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं आमजन से कार्यक्रम में ऑनलाइन सहभागिता करने का आग्रह किया है।
यह जानकारी कुलसचिव यशपाल आहूजा ने दी। देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के उच्च शिक्षा संस्थानों को और अधिक संसाधन युक्त बनाने और रोजगारोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के रूप में विकसित की गई योजना का शुभारम्भ 20 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इसके लिए महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय को 20 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। इस प्राप्त अनुदान से विश्विद्यालयों में नवीन भवनों के निर्माण के साथ प्रयोगशाला उपकरण, प्रयोगशाला आधुनिकीकरण के कार्य करवाए गए।
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पंद्रह दिवसीय खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार प्रशिक्षण संपन्न
सफल प्रतिभागियों को वितरित किए प्रमाण पत्र
बीकानेर, 4 जून। स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र, बीकानेर-प्रथम द्वारा आयोजित 15 दिवसीय ‘खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार प्रशिक्षण’ का गुरुवार को हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य उर्वरक विक्रेताओं, कृषि उद्यमियों एवं स्नातकों को उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, उर्वरक अधिनियम एवं कृषि में नवीन तकनीकों की जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे किसानों को बेहतर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. दीपाली धवन, निदेशक प्रसार शिक्षा, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी आवश्यक है। संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की जानकारी किसानों तक पहुंचाने में उर्वरक विक्रेताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित उर्वरक विक्रेता केवल विक्रेता ही नहीं बल्कि किसानों के लिए तकनीकी सलाहकार के रूप में भी कार्य करते हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को कृषि क्षेत्र में नवाचारों को अपनाने तथा किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. वीर सिंह, अधिष्ठाता (डीन), सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय, स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने कहा कि कृषि विकास में ज्ञान आधारित सेवाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उर्वरक विक्रेताओं को केवल व्यापारिक दृष्टिकोण तक सीमित न रहकर किसानों को उचित उर्वरक चयन, मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी जानकारी भी प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित एवं प्रमाणित विक्रेता कृषि उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ किसानों की लागत कम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
सहायक निदेशक उद्यान मुकेश गहलोत ने इस विशेष प्रशिक्षण उर्वरक (फर्टिलाइज़र) प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों और उर्वरक विक्रेताओं को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्व प्रबंधन तथा फसलों में उर्वरकों के वैज्ञानिक प्रयोग के बारे में जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. मदन लाल रेगर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, बीकानेर-I ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 15 दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985, आवश्यक वस्तु अधिनियम, उर्वरकों की गुणवत्ता एवं मानक, विभिन्न फसलों के लिए पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, जैव उर्वरकों का उपयोग, सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्व, उर्वरकों का सुरक्षित भंडारण एवं परिवहन, कृषि में डिजिटलीकरण तथा कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय एवं कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें उर्वरक प्रबंधन, जल संरक्षण, फसल पोषण, कृषि पर्यावरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, मृदा परीक्षण तकनीक, कृषि उद्यमिता तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सेवाएँ उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षणार्थियों को प्रयोगशाला भ्रमण, मृदा एवं जल परीक्षण की प्रक्रियाओं तथा कृषि विज्ञान केन्द्र की विभिन्न तकनीकी इकाइयों का अवलोकन भी कराया गया।
डॉ. सुशील कुमार खरिया, सहायक आचार्य, कृषि महाविद्यालय, बीकानेर ने कहा कि उर्वरकों का असंतुलित उपयोग मृदा की उर्वराशक्ति को प्रभावित करता है। इसलिए मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), उर्वरक गुणवत्ता मानकों, नकली एवं मिलावटी उर्वरकों की पहचान तथा किसानों को वैज्ञानिक सलाह देने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में टिकाऊ विकास के लिए वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन को अपनाना अनिवार्य है।
समापन समारोह में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रशिक्षण से उन्हें उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, विधिक प्रावधानों तथा किसानों को तकनीकी परामर्श देने संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है, जिसका उपयोग वे अपने व्यावसायिक एवं सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा सफल प्रतिभागियों को खुदरा उर्वरक विक्रय प्राधिकार विषयक प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। समारोह में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, प्रशिक्षणार्थियों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रहे।
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वंदे गंगा, जल संरक्षण जन अभियान : जिला कलेक्टर ने किया पौधारोपण
बीकानेर, 4 जून। जिला कलेक्टर निशांत जैन ने गुरुवार को सर्किट हाउस के सामने रोड किनारे और सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता कार्यालय में पौधारोपण किया।
उन्होंने कहा कि वंदे गंगा, जल संरक्षण अभियान के तहत जल संरक्षण के प्रति जागरूकता के साथ पौधारोपण भी किया जा रहा है। उन्होंने इन पौधों की देखभाल करने के निर्देश दिए। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता डॉ. विमल कुमार गहलोत ने बताया कि अभियान के तहत विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियों की गई। इनमें 28 मई को विभाग के अधीन आने वाले समस्त राजकीय कार्यालय भवन की छतों और इन भवनों के आरटीडब्लूएचएस की साफ-सफाई तथा रखरखाव का कार्य किया गया।
वहीं गुरुवार को पौधारोपण किया गया। जिसमें अधिशासी अभियंता विजय कुमार मीणा, सर्किट हाउस मैनेजर संदीप कुमार माथुर, सहायक तकनीकी सहायक तुषार बोहरा, सहायक अभियंता कुसुम पुरोहित, प्रतिभा पुरोहित सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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