मुख्यमंत्री की बांसवाड़ा के चुड़ादा गांव में जन-मन की चौपाल, लापरवाही पर बीसीएमओ एपीओ, जनसमस्याओं का मौके पर समाधान
मुख्यमंत्री की बांसवाड़ा के चुड़ादा गांव में जन-मन की चौपाल


बांसवाड़ा/जयपुर, 22 मई। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने बांसवाड़ा जिले के सुदूर आदिवासी अंचल में स्थित चुड़ादा गांव में रात्रि विश्राम के बाद गुरुवार सुबह एक बार फिर ग्रामीणों के बीच पहुंचकर सबको चौंका दिया। मुख्यमंत्री ने सुबह गांव की गलियों में पैदल भ्रमण कर स्थानीय लोगों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ के विचार को साकार करने के लिए काम कर रही है। ग्राम विकास चौपाल इसी दर्शन का जीवंत स्वरूप है, जहां अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है।


पीपल के पेड़ के नीचे सुनीं समस्याएं, लापरवाही पर बीसीएमओ एपीओ
भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पारंपरिक अंदाज में चौपाल लगाई और ग्रामीणों के अभाव-अभियोग सुने। चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने कुशलगढ़ के खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी (BCMO) डॉ. गिरिश भाभोर के विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं की गंभीर शिकायत की। मुख्यमंत्री ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की कड़ाई के बाद चिकित्सा विभाग ने त्वरित एक्शन लेते हुए डॉ. गिरिश भाभोर को तत्काल प्रभाव से एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया।


लाखों रुपये के विकास कार्यों की मौके पर ही स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से ‘चाय पर चर्चा’ करते हुए विभिन्न मांगों का मौके पर ही निस्तारण किया और अधिकारियों को वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए:
- 16.20 लाख रुपये: ग्राम ठुम्मठ में नए मां बाड़ी केंद्र के निर्माण हेतु स्वीकृत।
- 20 लाख रुपये: ठुम्मठ चौराहा पर सिंगल फेज ट्यूबवेल निर्माण के लिए मंजूर।
- 7 लाख रुपये: ग्राम चुड़ादा में मामा बालेश्वर दयाल मंदिर परिसर में इंटरलॉकिंग और सौंदर्यीकरण कार्य के लिए स्वीकृत।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने स्थानीय राजकीय विद्यालय में दो नए कक्षा-कक्षों के निर्माण और गांव के समीप एक दूध संकलन केंद्र (Milk Collection Centre) स्थापित करने के लिए भी विभाग को पाबंद किया।
मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता: पीड़ित बच्चे के पिता का तुरंत बदला पदस्थापन
दौरे के दौरान रोशनी कलाल नामक एक महिला ने मुख्यमंत्री को अपनी व्यथा सुनाई। उसने बताया कि उसका पुत्र ‘सेरेब्रल पाल्सी’ (Cerebral Palsy) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित है। महिला ने अपने पति हेमेंद्र कुमार कलाल (सहायक अभियंता) का पदस्थापन जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) कार्यालय सागवाड़ा से बांसवाड़ा करने का अनुरोध किया ताकि बच्चे की देखभाल ठीक से हो सके। मुख्यमंत्री ने इस पर गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही हेमेंद्र कुमार का पदस्थापन कार्यालय अधिशासी अभियंता परियोजना खंड बांसवाड़ा में करने के निर्देश दिए, जिसके आदेश भी तुरंत जारी कर दिए गए।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने पानी की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि जल का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए इसकी हर बूंद का सदुपयोग जरूरी है। उन्होंने डूंगरपुर क्षेत्र में सामुदायिक सहभागिता से हुए जल संरक्षण के कार्यों की सराहना की और किसानों से माइक्रो सिंचाई (Micro Irrigation), वर्षा जल संग्रहण, आधुनिक बहुआयामी खेती और डिग्गी निर्माण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि गांवों में ही रोजगार के अवसर विकसित कर युवाओं के पलायन को रोका जा सकता है।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध समाज सुधारक संत मामा बालेश्वर दयाल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। चौपाल के दौरान जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


