लू के थपेड़ों के बीच 310वें दिन भी जारी रहा पर्यावरण संघर्ष समिति का धरना
लू के थपेड़ों के बीच 310वें दिन भी जारी रहा पर्यावरण संघर्ष समिति का धरना


- नोखा दइया आंदोलन के हुए 675 दिन
- मरुस्थल की तपती दोपहरी में खेजड़ी का विनाश वन्यजीवों और पशुधन के लिए बना काल: पन्नाराम सियाग
बीकानेर, 23 मई। एक तरफ जहाँ दिन-प्रतिदिन तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है और भीषण लू (लूं) के थपेड़ों से पूरा शहर जल रहा है, दोपहर होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है; वहीं दूसरी ओर मरुस्थल के गौरव ‘खेजड़ी’ वृक्ष को बचाने के लिए जागरूक पर्यावरण प्रेमी इस जानलेवा गर्मी में भी डटे हुए हैं। बीकानेर में पर्यावरण संघर्ष समिति का कलेक्ट्रेट के समक्ष धरना आज 310वें दिन भी निरंतर जारी रहा, जबकि इसी मुहिम के तहत नोखा दइया में चल रहे धरने को आज 675 दिन पूरे हो गए हैं।


जैव विविधता पर मंडरा रहा है भयंकर खतरा
बीकानेर धरने पर समर्थन देने पहुँचे पर्यावरण प्रेमी एवं पलाना गौ सेवा समिति के अध्यक्ष पन्नाराम सियाग ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मरुस्थल की इस तपती दोपहरी में खेजड़ी का असली महत्त्व यहाँ के बेजुबान पक्षियों और वन्यजीवों से पूछना चाहिए। सियाग ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य कारणों से मरुक्षेत्र में खेजड़ी व स्थानीय वनस्पति का बड़े पैमाने पर जो विनाश किया जा रहा है, उसने वन्यजीवों और क्षेत्र के समृद्ध पशुधन का जीना बेहाल कर दिया है।


उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खेजड़ी की कटाई तुरंत नहीं रुकी, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में वन्यजीवों की संख्या में भारी गिरावट आएगी, जिससे मरुधरा की पूरी जैव विविधता को भयंकर खतरा पैदा हो जाएगा।
तपती धूप में ये पर्यावरण प्रेमी बैठे धरने पर
भीषण गर्मी और लू की परवाह किए बिना शनिवार को धरने पर बैठने वाले प्रमुख पर्यावरण प्रेमियों में हरिराम खीचड़, शिवदान मेघवाल, परताराम चौधरी,सुगनाराम चौधरी, शान्तिलाल सेठिया, हनुमान महिया,गोपीचन्द धायल, अर्जुनराम भादू, रामलाल सियाग, पूनमराम रिख, हेतराम गोदारा (एलडी मगरा), हुसैन हिन्दुस्तानी और लाधुराम गोदारा शामिल रहे।
समिति के सदस्यों ने हुंकार भरी कि जब तक खेजड़ी और पर्यावरण के संरक्षण को लेकर प्रशासन कोई ठोस और धरातलीय कदम नहीं उठाता, उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन और क्रमिक धरना इसी तरह जारी रहेगा।


