बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण के लिए 298 दिनों से जारी है संघर्ष समिति का धरना
बीकानेर में पर्यावरण संरक्षण के लिए 298 दिनों से जारी है संघर्ष समिति का धरना


बीकानेर, 11 मई। बीकानेर में पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी को बचाने के लिए पर्यावरण संघर्ष समिति का आंदोलन लगातार जारी है। बीकानेर शहर में चल रहे धरने को आज 298 दिन पूरे हो गए हैं, वहीं नोखा दईया में जारी धरना 663वें दिन में प्रवेश कर गया है। यह आंदोलन सौर ऊर्जा परियोजनाओं के अनियंत्रित विस्तार और उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के खिलाफ एक बड़ी आवाज बनकर उभरा है।


सोलर प्लांट और जमीन के भविष्य पर मंथन
धरने को संबोधित करते हुए पर्यावरण प्रेमी मोखराम धायल ने सौर ऊर्जा संयंत्रों (सोलर प्लांट) के दूरगामी प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरकार को सोलर प्लांटों से होने वाले केवल तात्कालिक लाभ के बजाय, इनसे होने वाले ‘नफे-नुकसान’ का गहरा आंकलन करना चाहिए। धायल ने चेतावनी दी कि हमें इस पर गंभीरता से मंथन करना होगा कि क्या इन परियोजनाओं के बाद किसान अपनी जमीनों के मालिक बने रहेंगे या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन, अकाल और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों पर भी ध्यान आकर्षित किया।


खेजड़ी का विनाश और जलवायु परिवर्तन
एक अन्य पर्यावरण प्रेमी सुगनाराम चौधरी ने वनस्पति के विनाश को जलवायु परिवर्तन का मूल कारण बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजस्थान के गौरव और बहु-उपयोगी खेजड़ी के वृक्षों की कटाई को हर हाल में रोका जाना चाहिए। चौधरी ने जमीन देने वाले काश्तकारों को आगाह करते हुए कहा कि आने वाले समय में सोलर प्लांटों के कारण कई किसान अपनी जमीनों के मालिकाना हक से हाथ धो सकते हैं।
जुझारू साथियों का मिल रहा है साथ
धरने पर बीकानेर के अनेक पर्यावरण प्रेमी और समाजसेवी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। आज के धरने में गंगाबिशन सियाग, शिवदान मेघवाल, शान्तिलाल सेठिया, रामसिंह राहड़, हेतराम बिशनोई, ताहिर खान, कॉमरेड जेठाराम लाखूसर, सत्य नारायण कुलड़िया, कोडाराम भादू, लालूराम सारण और कॉमरेड मूलचन्द खत्री सहित कई गणमान्य जन शामिल रहे।
आंदोलनकारी इस संकल्प के साथ डटे हुए हैं कि जब तक पर्यावरण और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित नहीं होती, यह संघर्ष अनवरत जारी रहेगा।


