बच्चों में संस्कार, संवाद और सृजनात्मकता का विकास आवश्यक
बच्चों में संस्कार, संवाद और सृजनात्मकता का विकास आवश्यक



बीकानेर, 15 जून। मुक्ति संस्था, बीकानेर के तत्वावधान में गंगाशहर स्थित चौपड़ा बाड़ी में सोमवार को ‘बाल समागम संवाद’ समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। इस विशेष समागम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में संवाद कौशल, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक सोच और सामाजिक चेतना का विकास करना था। कार्यक्रम में शहर के सैकड़ों बच्चों ने पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया।


समारोह की अध्यक्षता शिक्षाविद एवं शिक्षा विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक ओमप्रकाश सारस्वत ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में बेंगलुरु के शोधार्थी प्रणव अग्रवाल ने शिरकत की।


बाल मन अत्यंत संवेदनशील और सृजनशील: प्रबुद्ध वक्ता
समारोह के दौरान शिक्षाविदों और विद्वानों ने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
संस्कार और नैतिक मूल्य: अध्यक्षीय उद्बोधन में ओमप्रकाश सारस्वत ने कहा कि बालक राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। उनके सर्वांगीण विकास में शिक्षा के साथ-साथ उच्च संस्कार और सतत संवाद की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने बच्चों को नियमित अध्ययन करने और जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
कला और रचनात्मकता से जुड़ाव: मुख्य अतिथि राजेन्द्र जोशी ने बाल मन की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों को साहित्य, कला और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उनकी छिपी हुई प्रतिभा को एक नई और सही दिशा दी जा सकती है। उन्होंने बच्चों को पठन-पाठन और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया।
जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण: मुख्य वक्ता प्रणव अग्रवाल ने बच्चों से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में ज्ञान, जिज्ञासा और नवाचार (इन्नोवेशन) ही सफलता की असली कुंजी हैं। उन्होंने बच्चों को बिना झिझक के प्रश्न पूछने, नई चीजें सीखने तथा अपने भीतर एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अटूट आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से दुनिया का हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
बच्चों ने पूछे प्रशासनिक व राजनीतिक सवाल, जाना सफलता का मंत्र
समागम के दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। कार्यक्रम में केवल व्याख्यान ही नहीं हुआ, बल्कि बच्चों ने भी मंच से अपने विचार खुलकर व्यक्त किए। प्रश्नकाल के दौरान बच्चों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और समसामयिक राजनीतिक व्यवस्था को लेकर बेहद तीखे व समझदारी भरे सवाल दागे। इसके साथ ही कई मेधावी बच्चों ने अपने जीवन के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के व्यावहारिक टिप्स और उपायों के बारे में अतिथियों से मार्गदर्शन लिया। इस दौरान शिक्षाविद भवानी सोलंकी ने भी बच्चों के साथ आत्मीय संवाद स्थापित कर उनकी शंकाओं का समाधान किया।
अभिभावकों की रही गरिमामय उपस्थिति: समागम के सौहार्दपूर्ण समापन पर संस्था के पदाधिकारियों ने पधारे हुए सभी अतिथियों, सजग अभिभावकों और बच्चों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जयपुर के शोधार्थी निखिल अग्रवाल, आधारशिला ग्लोबल अकादमी के निदेशक कमलचन्द पंवार, अरुणा भाटी, दीपक कुमार, शिवानी, भागवंती, रमेश चन्द्र, गीता जैन और दुर्गा रामावत सहित बड़ी संख्या में अभिभावक और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।


