मरुस्थल की स्वास्थ्य चुनौतियों से ‘वन हेल्थ’ तक हुआ मंथन, बीकानेर में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

मरुस्थल की स्वास्थ्य चुनौतियों से ‘वन हेल्थ’ तक हुआ मंथन, बीकानेर में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
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  • राज आईएपीएसएम कॉन-26’ का भव्य शुभारंभ; मातृ-शिशु स्वास्थ्य, रोगों की रोकथाम और शोध को जनस्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर केंद्रित रहे वैज्ञानिक सत्र

बीकानेर,24 अक्टूबर । मरुस्थलीय क्षेत्रों की विशेष स्वास्थ्य समस्याओं, मातृ-शिशु देखभाल तथा मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ने वाली ‘वन हेल्थ’ अवधारणा पर शनिवार को बीकानेर में विषय विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श किया। सरदार पटेल (एसपी) मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की मेजबानी में दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन ‘राज आईएपीएसएम कॉन-26’ (RAJIAPSM CON 2026) का विधिवत शुभारंभ हुआ। पहले दिन के विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में स्थानीय स्वास्थ्य आवश्यकताओं को समझने, अनुसंधान को धरातल पर उतारने और सामुदायिक सहभागिता से जनस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया गया।

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‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन’ (IAPSM) की राजस्थान शाखा के तत्वावधान में आयोजित इस 15वें वार्षिक सम्मेलन की थीम ‘सीमाओं के पार जनस्वास्थ्य का एकीकरण’ रखी गई है। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि आईसीएमआर-एनआईएचआर जोधपुर के निदेशक डॉ. पंकज भारद्वाज तथा विशिष्ट अतिथि कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वी. एल. व्यास रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने की।

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वैज्ञानिक संवाद से स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई दिशा

प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुभवों और नवीन शोध-पत्रों पर हुए मंथन से जनस्वास्थ्य की जटिल चुनौतियों के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा। वहीं, अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. रेखा आचार्य ने बताया कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य, मरुस्थलीय क्षेत्रों की भौगोलिक समस्याओं और ‘वन हेल्थ’ पर केंद्रित यह सत्र युवा चिकित्सकों व शोधार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे।

मरुस्थलीय स्वास्थ्य समस्याओं एवं ‘वन हेल्थ’ पर विशेष चर्चा

मरुस्थलीय चुनौतियां: आयोजित पैनल चर्चा में डॉ. रूपेश कुमार, डॉ. अर्चना पालीवाल, डॉ. आशुतोष शर्मा और डॉ. नीलम कुमार ने राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं पर विचार व्यक्त किए।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने एकीकृत दृष्टिकोण पर विशेष व्याख्यान दिया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. रजत वोहरा एवं डॉ. महेंद्र खत्री ने की।

वन हेल्थ, वन राजस्थान: राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के सहायक निदेशक डॉ. जितेश कुवातड़ा ने परिकल्पना से क्रियान्वयन तक ‘वन हेल्थ’ के महत्व को रेखांकित किया। पैनल चर्चा में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव शैलजा देवल और वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी लेनिन भट्ट ने भी भाग लिया।

शोध को व्यवहार में उतारने और सामुदायिक भागीदारी पर जोर

डॉ. पंकज भारद्वाज ने शोध परियोजनाओं के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. आनंद पनिजयार ने शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की साझेदारी पर विचार रखे। इसके अतिरिक्त डॉ. सिमरन जुनेजा के सत्र में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम हेतु आयुर्वेद, योग, पोषण और प्राकृतिक चिकित्सा के साक्ष्य-आधारित समन्वय पर मंथन हुआ।

सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों द्वारा शोध-पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुतियां भी दी गईं। इस आयोजन में डॉ. एस. एस. टांटिया मेडिकल कॉलेज (श्रीगंगानगर) और बीरबलदास भीमराज राजकीय मेडिकल कॉलेज (हनुमानगढ़) सहयोगी संस्थान के रूप में भागीदारी निभा रहे हैं। दो दिवसीय सम्मेलन का समापन रविवार, 25 अक्टूबर को होगा।

 

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