रामझरोखा कैलाशधाम में भक्ति-भाव से मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव

रामझरोखा कैलाशधाम में भक्ति-भाव से मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव
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श्रद्धालुओं ने राष्ट्रीय संत श्री सरजूदास जी महाराज से ली कंठी, सीखा सेवा व संस्कार का मार्ग

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बीकानेर, 10 जुलाई। सुजानदेसर स्थित रामझरोखा कैलाशधाम में गुरु पूर्णिमा एवं राष्ट्रीय संत श्री सरजूदास जी महाराज का जन्मोत्सव हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। आयोजन में सुबह से लेकर देर रात तक हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने भक्ति, सेवा और सत्संग का अद्भुत संगम देखा।

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दिन की शुरुआत पूजन-अभिषेक से
प्रातःकाल राष्ट्रीय संत श्री सरजूदास जी महाराज ने नर्बदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक किया। इसके पश्चात परमहंस श्री सियाराम जी महाराज का अभिषेक एवं चरणवंदना की गई। पूज्य श्री रामदास जी महाराज की पूजा कर पुष्पवर्षा की गई तथा गौशाला में गौपूजन व गौसेवा की गई।

गुरु दीक्षा समारोह बना आकर्षण का केंद्र
शाम तक चले गुरु दीक्षा समारोह में सैकड़ों महिला-पुरुषों ने श्रीसरजूदास जी महाराज से कंठी धारण कर गुरु मंत्र प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर भजन गायक नवदीप बीकानेरी की संगीतमयी प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

गुरु के महत्व पर दिया सारगर्भित संदेश
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संत श्री सरजूदास जी महाराज ने कहा, “गुरु-शिष्य परंपरा युगों से चली आ रही है। गुरु पूर्णिमा न केवल शिष्य के लिए, बल्कि गुरु के लिए भी गौरव का क्षण होता है। आज के समय में जब धैर्य की कमी और मानसिक असंतुलन बढ़ रहा है, गुरु की सकारात्मक ऊर्जा ही शिष्य को आत्महत्या जैसे विचारों से बचा सकती है। गुरु वह होता है जो जीवन को दिशा देता है और सच्चे मार्ग पर चलना सिखाता है।”उन्होंने “गुरु: साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम:” श्लोक के माध्यम से गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि गुरु ही ब्रह्मा हैं, जो शिष्य को नवजीवन देते हैं, संस्कार देते हैं। उन्होंने संत कबीर के दोहे “हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर” का उल्लेख करते हुए गुरु की महत्ता पर प्रकाश डाला।

उत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सागर
गुरु पूजन, गौसेवा, सत्संग और भजन की इस श्रृंखला में रामझरोखा कैलाशधाम श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में समर्पण भाव से उपस्थित होकर इस पावन पर्व को आध्यात्मिक पर्व के रूप में मनाया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव बीकानेरवासियों के लिए न केवल धार्मिक अनुभूति का माध्यम बना बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली संस्कारपरक प्रेरणा भी बन गया।

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