राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है हिन्दी: डॉ. मदन केवलिया

राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है हिन्दी: डॉ. मदन केवलिया
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हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

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बीकानेर ,13 सितम्बर । प्रतिमान संस्थान, सादुलगंज के तत्वावधान में हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को ‘राष्ट्रीय एकता का सशक्तीकरण और हिन्दी’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने हिन्दी भाषा को देश की एकता, सांस्कृतिक अस्तित्व और राष्ट्रीय चेतना का मुख्य आधार स्तंभ बताया।

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स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संपर्क भाषा तक हिन्दी का अभूतपूर्व योगदान

राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति: मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. मदन केवलिया ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के सशक्तीकरण में हिन्दी का योगदान अतुलनीय है। इसने संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिन्दी समाचार पत्र-पत्रिकाओं की ऐतिहासिक भूमिका रही है। हिन्दी भारत की समृद्ध परंपराओं और लोकजीवन की सहजता को समेटे हुए देश की सर्वमान्य संपर्क भाषा बन चुकी है।

विश्व पटल पर बढ़ता मान-सम्मान: राजकीय डूंगर महाविद्यालय की सहायक आचार्य (हिन्दी) डॉ. शशि बेसरवारिया ने कहा कि हिन्दी दिवस हमें अपनी मातृभाषा और राजभाषा के प्रति गौरव की भावना को सुदृढ़ करने का अवसर देता है। आज वैश्विक स्तर पर हिन्दी को अभूतपूर्व सम्मान मिल रहा है, जो देश की एकता और अखंडता को संबल प्रदान करता है।

राजभाषा का दर्जा और जनसंचार में हिन्दी का प्रभाव
राजभाषा का ऐतिहासिक संदर्भ: एस.डी. पी.जी. महाविद्यालय (खाजूवाला) के प्राचार्य डॉ. मिर्जा हैदर बेग ने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।

विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान: पूर्व हिन्दी व्याख्याता कमलनारायण पुरोहित ने कहा कि साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता, सिनेमा और जनसंचार के माध्यमों से हिन्दी ने राष्ट्रीय एकता को निरंतर मजबूत किया है।

वैज्ञानिक व समृद्ध भाषा: कार्यक्रम संचालिका सी.ए. खुशी केवलिया ने हिन्दी को दुनिया की सबसे सरल, समृद्ध और वैज्ञानिक भाषाओं में से एक बताया।

कार्यक्रम के अंत में कथाकार शरद केवलिया ने उपस्थित सभी गणमान्य जनों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रभावती पुरोहित, सितारा परवीन, इंदिरा केवलिया, अवनि बेसरवारिया, मन्मथ केवलिया, उर्विजा, आदिल मिर्जा एवं अद्रिजा सहित कई साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।