कर्म और क्लेश के चक्र को तोड़ने के लिए तप, जप और ध्यान जरूरी- साध्वी त्रिशला कुमारी जी

पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का 6वां दिन ‘जप दिवस’ के रूप में
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गंगाशहर में 24 घंटे अनवरत गूंज रहा नमस्कार महामंत्र

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बीकानेर, 13 सितम्बर । श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदूषी शिष्या एवं सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी के पावन सान्निध्य में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का 6वां दिन ‘जप दिवस’ के रूप में अपार श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। गंगाशहर स्थित तेरापंथ भवन में साध्वीवृंद की प्रेरणा से 24 घंटे का अनवरत नमस्कार महामंत्र जप अनुष्ठान संचालित हो रहा है।

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कर्म और क्लेश के चक्र को तोड़ने के लिए तप, जप और ध्यान जरूरी- साध्वी त्रिशला कुमारी जी

कर्म, क्लेश और जन्म-मरण का चक्र
साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी का बोध: उन्होंने भगवान महावीर के पूर्व भवों का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि जब तक कर्म है तब तक क्लेश है, और जब तक क्लेश है तब तक जन्म-मरण का चक्र बना रहता है। इस चक्र को तोड़ने तथा आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए तप, जप, ध्यान और स्वाध्याय ही एकमात्र मार्ग हैं।

साध्वीवृंद के विचार: साध्वी श्री कल्पयशा जी ने नमस्कार महामंत्र, प्रतिक्रमण, पौषध एवं प्रायश्चित के महत्व को रेखांकित किया। साध्वी श्री निश्चय प्रभा जी ने कहा कि जिस प्रकार यात्रा के दौरान कम वजन रखा जाता है, उसी प्रकार आत्मा पर पापों का बोझ नहीं बढ़ने देना चाहिए। साध्वी श्री रश्मिप्रभा जी ने शुद्ध भावों से किए गए मंत्र जप को कर्म क्षय का अचूक माध्यम बताया।

सामूहिक जप रैली और 1500 सामायिक का कीर्तिमान
24 घंटे अनवरत अनुष्ठान: प्रतिदिन प्रातः 5:15 बजे से शुरू होने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन लगभग 1500 तक सामायिक दर्ज की जा रही हैं।

सामूहिक जप रैली: जप दिवस के अवसर पर साध्वीश्री की प्रेरणा से 250 से 300 श्रावक-श्राविकाओं ने एक साथ रैली के रूप में सामूहिक जप अनुष्ठान किया, जिससे संपूर्ण गंगाशहर क्षेत्र महामंत्र की पावन गूंज से भक्तिमय हो उठा।

गंगाशहर तेरापंथ भवन में 24 घंटे अनवरत गूंज रहा है नमस्कार महामंत्र

ज्ञानशाला से संस्कार निर्माण का आह्वान
सभा के मंत्री जतन लाल संचेती ने अभिभावकों से अपने बच्चों को ज्ञानशाला भेजने की अपील की। उन्होंने कहा कि ज्ञानशाला ही भावी पीढ़ी में संस्कार और संस्कृति के निर्माण का मुख्य केंद्र है, जिससे वृद्धावस्था भी सुख-शांति से व्यतीत हो पाती है। उन्होंने ‘बेटी तेरापंथ की’, ‘सभा आपके द्वारा’, ‘संस्कार निर्माण शिविर’ और ‘सघन साधना शिविर’ जैसे विविध संगठनात्मक आयामों की विस्तृत जानकारी दी।

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