संवत्सरी का केंद्र बिंदु है क्षमायाचना, तेरापंथ भवन गंगाशहर में जैन महासभा द्वारा सामूहिक क्षमापना समारोह आयोजित
संवत्सरी का केंद्र बिंदु है क्षमायाचना, तेरापंथ भवन गंगाशहर में जैन महासभा द्वारा सामूहिक क्षमापना समारोह आयोजित



गंगाशहर, 26 सितम्बर। जैन महासभा, बीकानेर के तत्वावधान में तेरापंथ भवन, गंगाशहर में जैन चारित्रात्माओं के पावन सान्निध्य में सामूहिक क्षमापना कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जैन महासभा की महिला विंग के मंगलाचरण से हुआ, जिसके बाद विभिन्न समाजों व संघों के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे से खमतखामणा कर क्षमायाचना की।


स्वागत भाषण देते हुए जैन महासभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा ने कहा कि जैन धर्म का क्षमापना पर्व दुनिया के महानतम पर्वों में से एक है, जो बिना किसी आडंबर या अपव्यय के मन की शुद्धता का संदेश देता है। उन्होंने संस्था की ओर से सकल समाज से क्षमायाचना की।


समारोह में साध्वीश्री त्रिशला कुमारी जी ने फरमाया कि जैन धर्म जीवन जीने की कला सिखाता है। भूल होने पर ‘खमतखामणा’ करना और दूसरों को क्षमा कर देना ही शांतिपूर्ण जीवन के दो मूलमंत्र हैं। साध्वी मुक्तांजना श्री जी ने कहा कि जब तक मन की कड़वाहट और बैर की गांठें नहीं खुलतीं, तब तक क्षमायाचना सार्थक नहीं होती। वहीं, साध्वी चितखरांज़ना श्री जी ने आपसी मनमुटाव दूर कर पारिवारिक व सामाजिक जीवन में सौहार्द बढ़ाने की प्रेरणा दी। साध्वी रश्मिप्रभा जी ने सुमधुर गीतिका तथा साध्वी कल्पयशा जी ने अपने उद्बोधन से क्षमा का महत्व रेखांकित किया।
जैन महासभा के पूर्व महामंत्री सुरेंद्र बद्धानी ने बताया कि वर्ष 2001 में स्थापित यह संस्था अपना रजत जयंती वर्ष मना रही है। यह सामूहिक क्षमापना कार्यक्रम प्रतिवर्ष दसलक्षण पर्व व अनंत चतुर्दशी के पश्चात पहले रविवार को आयोजित किया जाता है।
कार्यक्रम में खरतरगच्छ संघ से अजितमल खजांची, जैन रत्न हितैषी संघ से इंद्रमल सुराणा, हुक्मगच्छ संघ से भीखमचंद लुणिया, दिगंबर संघ से सुषमा जैन, तपागच्छ संघ से विकास सिरोहिया, तेरापंथ सभा गंगाशहर से नवरतन बोथरा, पार्श्वचंद्र गच्छ से प्रताप रामपुरिया, साधुमार्गी श्रावक संघ से सुमति सुराणा, अरिहंत मार्गी संघ से जयचंदलाल सुखानी, तेरापंथ सभा भीनासर से चैनप्रकाश गोलछा, चिंतामणि मंदिर प्रन्यास से हरीश नाहटा, महिला विंग से प्रेम नौलखा और जैन यूथ क्लब से पारस डागा ने अपने-अपने संघों की ओर से क्षमायाचना की।
इस अवसर पर चंपकमल सुराणा, विजय कोचर, निर्मल धारिवाल, राजेंद्र लुणिया, जैन लूणकरण छाजेड़, रविंद्र रामपुरिया, विनोद बाफना, महेंद्र सुराणा, मेघराज बोथरा, बसंत नौलखा, दिलीप कातेला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जतनलाल संचेती ने किया तथा आभार ज्ञापन मनीष नाहटा ने प्रस्तुत किया।
