अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला में एफआईआर दर्ज होने के बाद बड़ा खुलासा
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला में एफआईआर दर्ज होने के बाद बड़ा खुलासा



- 8 नामजद आरोपियों समेत 9 के खिलाफ केस, ‘अज्ञात’ की तलाश में एसआईटी
- 2 करोड़ की जमीन 18.5 करोड़ में खरीदी’— चंदे की चोरी के बाद अब जमीनों के विवादित सौदों की फाइलें भी खंगालेगी SIT
अयोध्या/लखनऊ, 26 जून अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे और दानपात्र की राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं, चोरी और गबन के सनसनीखेज मामले में एक नया और निर्णायक मोड़ आ गया है। इस पूरे प्रकरण में मंदिर ट्रस्ट के सदस्य श्रीकृष्ण मोहन की तहरीर और विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक संस्तुति के आधार पर 25 जून को एफआईआर संख्या 0090/2026 दर्ज कर ली गई है। इस एफआईआर में मंदिर प्रबंधन और चढ़ावा गणना से जुड़े 8 प्रभावशाली चेहरों को नामजद किया गया है, जबकि एक ‘अज्ञात’ आरोपी को भी शामिल किया गया है, जिसकी वास्तविक पहचान को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है। एफआईआर में शामिल अधिकांश आरोपी मंदिर में दानराशि की गिनती और कैश मैनेजमेंट के संवेदनशील कार्यों को संभाल रहे थे।


चाबी का रहस्य और करीबियों के घरों से लाखों की बरामदगी


इस पूरे घोटाले का मुख्य केंद्र बिंदु मंदिर की ‘चढ़ावा गणना प्रक्रिया’ को माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का सबसे अहम किरदार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू है, जो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी बताया जाता है। टिन्नू का मंदिर की हर व्यवस्था में सीधा हस्तक्षेप था और गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) की मुख्य चाबी भी उसी के पास रहती थी। इसके अलावा, ट्रस्टी अनिल मिश्र के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा और उसके साले लवकुश मिश्रा की ड्यूटी भी नोटों की गिनती में लगती थी। एसआईटी की जांच के दौरान इन दोनों के घरों से कथित तौर पर चोरी की गई मोटी रकम बरामद की जा चुकी है।
इसके साथ ही, टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव (जो खुद गणना प्रक्रिया का हिस्सा था) और अविनाश शुक्ला के खिलाफ भी पुख्ता सबूत मिले हैं। चर्चा है कि अविनाश शुक्ला के बैंक खाते से लगभग ₹5 लाख की संदिग्ध राशि बरामद हुई है। इस पूरे मामले में काउंटिंग इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि पूरी गिनती उन्हीं की सीधी निगरानी में होती थी। वहीं, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र पर अनुकल्प व लवकुश के साथ मिलकर इस आपराधिक साजिश को रचने और संरक्षण देने के गंभीर आरोप हैं।
नए कानून बीएनएस और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ा मुकदमा
अयोध्या पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ नव-लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराएं 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(a) के तहत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार, शुरुआती वित्तीय ऑडिट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (CCTV फुटेज) और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust), संगठित चोरी और गबन का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान पुलिस उपाधीक्षक (DSP) आशुतोष तिवारी को सौंपी गई है।

चंदे की हेरफेर से लेकर जमीन के ‘खेल’ तक: सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को सौंपे 11 दस्तावेज
इस विवाद के बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लखनऊ में एसआईटी अध्यक्ष व मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मुलाकात कर 11 महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे। संजय सिंह ने दावा किया कि चढ़ावा चोरी करने वाला यह गिरोह राम मंदिर के लिए खरीदी गई जमीनों के बड़े घपले में भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के लिए कई जमीनों को बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदकर राम भक्तों के चंदे को करोड़ों का चूना लगाया गया।
2 करोड़ की जमीन मिनटों में 18.5 करोड़ की हुई: सांसद द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों के मुताबिक, 18 मार्च 2021 को सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने कुसुम पाठक नामक विक्रेता से एक जमीन ₹2 करोड़ में खरीदी थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि महज कुछ ही मिनटों के भीतर उसी दिन यह जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को ₹18.5 करोड़ में बेच दी गई। इस एक ही सौदे में ₹16.5 करोड़ का सीधा अंतर है, जिसके आधिकारिक गवाह तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा थे। एसआईटी अब इन दोनों मामलों के अंतर्संबंधों की गहराई से जांच कर रही है।
Alleged Ayodhya Ram Mandir donations embezzlement case | Anukalp Mishra, Lavkush Mishra, Avinash Shukla, Tinnu Yadav, Manish Yadav and others have been named in the FIR. pic.twitter.com/9fgHUBJJiz
— ANI (@ANI) June 25, 2026
अधिकारियों के अनुसार जांच में एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट को भी शामिल किया जाएगा, ताकि सभी तथ्यों का समग्र परीक्षण हो सके। उधर, विपक्षी दल एफआईआर में किसी बड़े पदाधिकारी का नाम शामिल न किए जाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। जांच की निष्पक्षता पर आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जारी है।
इसके पहले, चढ़ावा चोरी के खुलासे के 19 दिन बाद और जांच के लिए गठित एसआईटी की सिफारिश के दो दिन बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज की गई। सभी पर साजिश के तहत धोखाधड़ी कर चढ़ावा राशि चोरी करने का आरोप है। जिसके बाद आठों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।


