पर्युषण महापर्व का छठे दिवस पर आर.आर. नगर में जप दिवस के रूप में हुयी धर्माराधना

पर्युषण महापर्व का छठे दिवस पर आर.आर. नगर में जप दिवस के रूप में हुयी धर्माराधना
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
  • रात्रि में हुआ ‘उपसर्गहर स्तोत्र’ का अनुष्ठान

बेंगलुरु ,13 सितम्बर। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का छठा दिन आर.आर. नगर स्थित तेरापंथ भवन में मुनि श्री आकाश कुमार जी एवं मुनि श्री हितेंद्र कुमार जी के पावन सान्निध्य में ‘जप दिवस’ के रूप में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जप, सामायिक, स्वाध्याय और सामूहिक आराधना का लाभ उठाया।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

जप से तेजस शरीर होता है सक्रिय: मुनि श्री आकाश कुमार जी

pop ronak

जप की महत्ता: मुनि श्री आकाश कुमार जी ने जप की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार में अनेक प्रकार की शक्तियाँ विद्यमान हैं, जिन्हें मंत्र जप के माध्यम से जागृत किया जा सकता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने जप के जरिए अनेक आध्यात्मिक सिद्धियाँ हासिल की हैं।

व्याधियों का शमन: उन्होंने बताया कि नियमित मंत्र जप से मनुष्य का तेजस शरीर सक्रिय होता है, जिससे शारीरिक और मानसिक आधि-व्याधियों का शमन संभव होता है।

भगवान पार्श्वनाथ का प्रसंग: मुनिश्री ने भगवान पार्श्वनाथ की महिमा का वर्णन करते हुए उनके जीवन-वृत्त पर प्रकाश डाला और बताया कि भगवान महावीर स्वामी के माता-पिता भी भगवान पार्श्वनाथ की परंपरा के उपासक थे।
माणक गणि जी के जीवन-चरित्र का वर्णन एवं उपसर्गहर स्तोत्र अनुष्ठान

माणक गणि जी का जीवन-चरित्र: मुनि श्री हितेंद्र कुमार जी ने अपने प्रवचन में आचार्य माणक गणि जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अल्पायु में ही उनका देहावसान हो गया था। उनके चाचा लाला लक्ष्मी जी ने उनका पालन-पोषण कर दीक्षा की अनुमति दी। आगे चलकर वे अत्यंत विद्वान आचार्य बने, जिनकी तीक्ष्ण चयन-बुद्धि, जागरूकता और अध्ययनशीलता अनुकरणीय थी।

उपसर्गहर स्तोत्र अनुष्ठान:

जप दिवस की श्रृंखला में आचार्य भद्रबाहु स्वामी द्वारा रचित प्रसिद्ध ‘उपसर्गहर स्तोत्र’ का सामायिकपूर्वक विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया, जिसे लेकर श्रावक-श्राविकाओं में भारी उत्साह देखा गया।तेरापंथ सभा द्वारा भवन में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु जप, ध्यान एवं सामायिक के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गईं।