RGHS में तकनीकी जटिलताओं और बायोमेट्रिक अनिवार्यता के खिलाफ भड़का आक्रोश

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खमत खामणा

बीकानेर/जयपुर, 20 जून । राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में किए गए हालिया बदलावों के खिलाफ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर वीरेंद्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजीनियर अरविंद कौशल ने एक संयुक्त बयान जारी कर इन बदलावों को कर्मचारी विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि नए प्रशासनिक प्रावधानों, बायोमेट्रिक अनिवार्यता और तकनीकी जटिलताओं के कारण अब कैशलेस इलाज पाना बेहद कठिन हो जाएगा, जिससे योजना की मूल भावना ही समाप्त हो रही है।

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महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवा को बीमा आधारित व्यवस्था के अधीन लाने से वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पेंशनर्स को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। विशेष रूप से दूर-दराज के क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या या फिंगरप्रिंट सत्यापन (बायोमेट्रिक) न होने की स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज मिलना असंभव हो जाएगा। अस्पतालों में बार-बार सत्यापन और तकनीकी निर्भरता के चलते मरीज और उनके परिजन मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं।

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पेंशनर्स महासंघ के वरिष्ठ सदस्यों डॉ. सुरेंद्र कुमार भटनागर, डॉ. भारत सिंह भीमावत, नेमाराम जाट सहित अन्य पदाधिकारियों ने सरकार के इस एकतरफा फैसले पर असंतोष व्यक्त किया है। महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि इन जटिल आदेशों को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पूर्व की भांति सरल, पारदर्शी और वास्तविक कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए और किसी भी बदलाव से पहले कर्मचारी संगठनों से चर्चा की जानी जरूरी है।