बेगूं में पागल श्वान का तांडव- 8 गांवों के 24 से अधिक लोग लहूलुहान; अस्पताल में मची चीख-पुकार और दहशत

बेगूं में पागल श्वान का तांडव- 8 गांवों के 24 से अधिक लोग लहूलुहान
shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025

बेगूं (चित्तौड़गढ़), 1 मार्च 2026। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं उपखंड क्षेत्र में रविवार को उस समय कोहराम मच गया, जब एक पागल श्वान ने सात किलोमीटर के दायरे में स्थित आठ गांवों में सिलसिलेवार हमले कर दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। श्वान के इस हिंसक व्यवहार से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में भारी दहशत फैल गई है।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

7 किलोमीटर का खूनी सफर: एक के बाद एक 8 गांवों को बनाया निशाना

pop ronak

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पागल श्वान ने सबसे पहले करणपुरिया गांव में हमला शुरू किया और फिर गुलाना, आंवलहेड़ा, ठुकराई, श्रीनगर, शादी, बामनहेड़ा और मडावदा गांवों में आतंक मचाया। श्वान इतना आक्रामक था कि वह राह चलते लोगों और घरों के बाहर बैठे बुजुर्गों पर अचानक झपट्टा मार रहा था। किसी को संभलने का मौका मिलता, उससे पहले ही वह उन्हें काट कर अगले गांव की ओर भाग निकलता।

अस्पताल में घायलों का तांता: एक गंभीर घायल चित्तौड़गढ़ रेफर
श्वान के हमले में शिवलाल शर्मा, गायत्री शर्मा, देवकन्या, केसर बाई, बोथलाल, भवानी शंकर, रामचंद्र धाकड़ और भेरूलाल सहित करीब 24 लोग घायल हुए हैं। श्रीनगर गांव में अकेले 10 लोगों को निशाना बनाया गया।

आपातकालीन उपचार: सभी घायलों को तुरंत बेगूं के राजकीय चिकित्सालय पहुँचाया गया, जहाँ डॉक्टरों की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए।

हालत गंभीर: गुलाना निवासी श्यामलाल की स्थिति अधिक बिगड़ने पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उच्च केंद्र चित्तौड़गढ़ रेफर किया गया है।

प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
इस घटना के बाद क्षेत्र के गांवों में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि आवारा और हिंसक श्वानों की समस्या पर प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। आक्रोशित लोगों ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि पागल श्वान को तुरंत पकड़कर आबादी क्षेत्र से दूर किया जाए। आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान चलाया जाए। फिलहाल, ग्रामीणों ने लाठियां लेकर अपने स्तर पर पहरा देना शुरू कर दिया है ताकि दोबारा किसी बच्चे या बुजुर्ग को शिकार होने से बचाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *