बच्चों के बुखार पर ‘फोकस’- बीकानेर में चिकित्सा विशेषज्ञों ने दिया मंत्र—”भय से नहीं, वैज्ञानिक सोच से करें उपचार

भारतीय बाल रोग अकादमी द्वारा बच्चों में बुखार पर चिकित्सकों की विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला
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बीकानेर, 1 मार्च 2026। भारतीय बाल रोग अकादमी की ‘अध्यक्षीय कार्य योजना 2026’ के तहत रविवार को रानी बाजार स्थित होटल मरुधर पैलेस में बच्चों के बुखार के सटीक आंकलन और आधुनिक उपचार पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला ‘फोकस’ (FOCUS) संपन्न हुई। बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी और सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के बाल एवं शिशु रोग विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जयपुर, गुड़गांव और बीकानेर के 60 से अधिक शिशु रोग विशेषज्ञों और रेजिडेंट डॉक्टरों ने भाग लिया।

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एंटीबायोटिक का अंधाधुंध उपयोग चिंताजनक
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद बच्चों में मामूली बुखार होने पर भी अनावश्यक जांच और एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है।

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तीन-क्षेत्र पद्धति (Three-Zone Method): विभागाध्यक्ष डॉ. जी.एस. तंवर ने बुखार प्रबंधन की ‘यूनिवर्सल पद्धति’ पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि हरा क्षेत्र (Green Zone) वह है जहाँ बच्चा स्वस्थ दिखता है और केवल परामर्श से उपचार संभव है। पीला क्षेत्र (Yellow Zone) में सावधानीपूर्वक चयनित जांच की जरूरत होती है, जबकि लाल क्षेत्र (Red Zone) आपात स्थिति को दर्शाता है जहाँ त्वरित भर्ती अनिवार्य है।

शीतला अष्टमी और प्रोबायोटिक्स का वैज्ञानिक संबंध
जयपुर से आए पेट व लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव अग्रवाल ने एक रोचक व्याख्यान में आधुनिक विज्ञान को सामाजिक परंपराओं से जोड़ा।
लाभदायक जीवाणु: उन्होंने बताया कि हमारे शरीर में कई मित्र जीवाणु होते हैं जो बीमारियों से बचाते हैं, लेकिन बिना सोचे-समझे एंटीबायोटिक लेने से वे नष्ट हो जाते हैं।

परंपरा और विज्ञान: उन्होंने ‘शीतला अष्टमी’ जैसी परंपराओं और आहार के महत्व को प्रोबायोटिक्स की भूमिका से जोड़ते हुए समझाया कि वातावरण और खान-पान किस तरह बुखार के कारणों को प्रभावित करते हैं।

विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: वीडियो क्लिप्स से दी ट्रेनिंग
डॉ. किशोर अग्रवाल (जयपुर): उन्होंने टीबी, मलेरिया और पीलिया जैसे रोगों में दवाओं के सही चयन और बुखार नापने के सही तरीकों पर प्रकाश डाला।

डॉ. नेहा रस्तोगी (गुड़गांव): उन्होंने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार बुखार के कारणों और उनके उपचार पर विशेष वीडियो क्लिप्स का प्रदर्शन कर आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. पी.सी. खत्री व डॉ. श्याम अग्रवाल: इन वरिष्ठ चिकित्सकों ने समय के साथ बदलते बुखार के लक्षणों और जोखिम वर्गीकरण की विस्तृत व्याख्या की। फोकस मॉड्यूल का उद्देश्य बुखार प्रबंधन को प्रतिक्रियात्मक से तर्कसंगत बनाना है, जिससे बच्चे सुरक्षित रहें, अभिभावक आश्वस्त हों और चिकित्सा वैज्ञानिक दिशा में आगे बढ़ सके।

रेजीडेंट डॉक्टरों के लिए क्विज़ और सम्मान
कार्यशाला के अंत में डॉ. तंवर और डॉ. नेहा रस्तोगी द्वारा एक ‘इंटरएक्टिव क्विज़’ सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. रेनू अग्रवाल ने किया, जबकि संचालन मुख्य समन्वयक डॉ. अनुभव चौधरी ने किया।

गुड़गांव, जयपुर तथा बीकानेर के विशेषज्ञ चिकित्सकों का शील्ड, प्रशस्ति पत्र से अभिनंदन डॉ.जी.एस.तंवर, डॉ.श्याम अग्रवाल, डॉ. डॉ. सी. के. चाहर, डॉ. विजय चलाना, डॉ. ओ. पी. चाहर, डॉ. मुकेश बेनीवाल, डॉ. सारिका स्वामी, डॉ. पवन डारा, डॉ. अनिल लाहोटी, डॉ. कुलदीप सिंह बिठू, डॉ. महेश शर्मा, डॉ.एल.सी.बैद, डॉ. धीरज शर्मा, डॉ. अनिल दूसा, डॉ. गौरव पारीक, डॉ. संतोष चांडक और डॉ. हरि किशन सुथार वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञों ने किया। इन्हीं चिकित्सकों ने विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता की।

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