बीकानेर में विश्वशांति और मनोकामना पूर्ति के लिए हो रहा ‘सवालाख पार्थिव शिवलिंग’ का निर्माण

बीकानेर में विश्वशांति और मनोकामना पूर्ति के लिए हो रहा 'सवालाख पार्थिव शिवलिंग' का निर्माण
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quicjZaps 15 sept 2025
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बीकानेर, 11 जुलाई। सावन मास आते ही बीकानेर नगरी पूरी तरह से शिवमय हो जाती है। ‘छोटी काशी’ के नाम से मशहूर बीकानेर में सावन माह में शिव भक्त अपने आराध्य को अलग-अलग तरीकों से पूजते हैं। कोई पूजा-अर्चना में लीन होता है, तो कोई पार्थिव शिवलिंग निर्माण जैसे महापुण्य के कार्यों में जुट जाता है। मंदिरों, बगीचों और घरों में हर जगह शिव भक्ति की अनूठी छटा देखने को मिल रही है।

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मानेश्वर महादेव मंदिर में अनुष्ठान का आरंभ
इसी शिव भक्ति से नत्थुसर गेट के अंदर स्थित प्राचीन मानेश्वर महादेव मंदिर भी अछूता नहीं है। यहां पंडितों द्वारा सवालाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जा रहा है। पंडित चंद्रशेखर श्रीमाली और पंडित अमित ओझा के सान्निध्य में यह ‘सवालाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण अनुष्ठान’ शुरू हो गया है। इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य सकल मनोकामना पूर्ति, आरोग्य और विश्व शांति है। पंडित हनुमान श्रीमाली ने बताया कि शिव महापुराण में पार्थिव शिवलिंग का विशेष महत्व बताया गया है। इन शिवलिंगों को मनवांछित मनोकामना पूर्ण करने के लिए विशेष रूप से बनाया जाता है, और दिनभर बने शिवलिंगों पर शाम को रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना की जाती है।

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पवित्र मिट्टी और गंगा नदी में विसर्जन
संजय श्रीमाली के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए तीर्थ स्थल की मिट्टी का उपयोग किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से कोलायत तालाब की पवित्र मिट्टी लाकर, उसमें भस्म, गाय का गोबर, गंगाजल और घी मिलाकर मिट्टी तैयार की जाती है। फिर इस मिश्रण से अंगुल मात्र शिवलिंग बनाए जाते हैं। मानेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित चंद्रशेखर श्रीमाली ‘कालू महाराज’ ने बताया कि पूरे सावन मास में इन पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा, और फिर इन शिवलिंगों का विसर्जन हरिद्वार में स्थित गंगा नदी में विधि-विधान से किया जाएगा।

इस पुनीत कार्य में पंडित चंद्रशेखर श्रीमाली, पंडित अमित ओझा, दीपक श्रीमाली, जितेंद्र व्यास, राजा पुरोहित, ऋषभ पुरोहित, गोपाल दास किराड़ू, बसंत श्रीमाली, अजय, पंडित प्रदीप श्रीमाली, गिरिराज व्यास, नवरतन श्रीमाली, मणिशंकर, काना, लक्की, अक्षय, राघव, हर्षित पूर्णिमा श्रीमाली, लक्ष्मी, सरिता श्रीमाली, राखी, मणिशंकर, अक्षय पुरोहित, गणेश छंगाणी, बसंत श्रीमाली, नवरतन, लक्की पुरोहित, अजय श्रीमाली, काना, हर्षित और कार्तिक सहित अनेक भक्तगण सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

यह अनुष्ठान बीकानेर में धार्मिक आस्था और सामुदायिक सौहार्द का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

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