एमएनआरई में सोलर संगठनों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन, बीकानेर एसोसिएशन ने ऊर्जा मंत्रालय को सौंपा ज्ञापन
एमएनआरई में सोलर संगठनों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन, बीकानेर एसोसिएशन ने ऊर्जा मंत्रालय को सौंपा ज्ञापन


- उपभोक्ताओं व उद्यमियों की समस्याओं को लेकर दिल्ली में हुआ संवाद; डीसीआर मॉड्यूल की कीमतों में वृद्धि पर जताई चिंता
- मंत्रालय का आश्वासन: सौर ऊर्जा क्षेत्र में कालाबाजारी और अनुचित मूल्य वृद्धि करने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई
बीकानेर/नई दिल्ली, 4 जून। देश के सौर ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने और जमीनी स्तर पर उद्यमियों व उपभोक्ताओं को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों के समाधान के लिए विभिन्न संगठनों ने दिल्ली में अपनी आवाज बुलंद की। ‘बीकानेर एसोसिएशन ऑफ सोलर एनर्जी’ (BASE) और अन्य सोलर संगठनों के प्रतिनिधियों ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के समक्ष शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखीं। इस दौरान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई विस्तृत बैठक में सौर ऊर्जा के भविष्य और बाजार की विसंगतियों पर गंभीर मंथन हुआ।


मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक
दिल्ली पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस बैठक में एमएनआरई (MNRE) के वरिष्ठ अधिकारी आदित्य सिंह, वैज्ञानिक करण धार और नीति निर्माण से जुड़े अन्य विशेषज्ञों ने सोलर प्रतिनिधियों के पक्ष को सुना। प्रतिनिधिमंडल में शामिल विशेषज्ञों ने सौर उद्योग की वर्तमान चुनौतियों को आंकड़ों के साथ प्रस्तुत किया।


बीकानेर व जयपुर का प्रतिनिधित्व: बीकानेर से डॉ. शरद दत्त आचार्य व नीरज गहलोत तथा जयपुर से अर्पित खंडेलवाल ने राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों में उपभोक्ताओं और इंस्टॉलेशन कंपनियों द्वारा झेली जा रही समस्याओं को पुरजोर तरीके से रखा।
उद्योग की चुनौतियां: सोलर संगठन की ओर से अरविंद सिंधावा ने उद्योग की वर्तमान परिस्थितियों और व्यावहारिक बाधाओं पर मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया।
डीसीआर मॉड्यूल की कीमतों में ‘कृत्रिम वृद्धि’ पर कड़ा विरोध
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा डीसीआर (DCR) सोलर मॉड्यूल्स की कीमतों में हालिया असामान्य बढ़ोतरी रहा। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय को अवगत कराया कि कुछ तत्व बाजार में कृत्रिम अभाव पैदा कर कीमतों को जानबूझकर बढ़ा रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल की मुख्य चिंताएं
- नीतिगत बदलावों की आड़ में मॉड्यूल्स की जमाखोरी और कालाबाजारी की जा रही है।
- अनावश्यक मूल्य वृद्धि से छोटे उद्यमियों और सौर परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है।
- इसका सीधा वित्तीय भार आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य में बाधक है।
मंत्रालय का सख्त रुख: होगी वैधानिक कार्रवाई
सोलर प्रतिनिधियों की बात सुनने के बाद मंत्रालय के अधिकारियों ने विषय की गंभीरता को स्वीकार किया। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सरकार सौर ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि कहीं भी अनुचित मूल्य वृद्धि या कृत्रिम संकट पैदा करने जैसी गतिविधियां पाई जाती हैं, तो उनके विरुद्ध तत्काल कठोरतम वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सरकार का प्रयास है कि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर दिया ज्ञापन
सोलर संगठनों ने मंत्रालय को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा। इस ज्ञापन में देश की ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करने, घरेलू विनिर्माण (डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग) को प्रोत्साहन देने और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए संतुलित नीति निर्माण के संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। प्रतिनिधियों ने मांग की कि सरकार ऐसी व्यावहारिक नीतियां बनाए जिससे छोटे से छोटा उद्यमी भी देश के सौर मिशन में सक्रिय भागीदारी निभा सके।


