राजस्थान में प्रसूती वार्डों पर बड़ा सवाल: कोटा, बीकानेर, जोधपुर और नागौर-डीडवाना में सिजेरियन के बाद क्यों बिगड़ी माताओं की तबीयत?

राजस्थान में प्रसूती वार्डों पर बड़ा सवाल: कोटा, बीकानेर, जोधपुर और नागौर-डीडवाना में सिजेरियन के बाद क्यों बिगड़ी माताओं की तबीयत?
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quicjZaps 15 sept 2025
STBA 5 JUNE 2026

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  • राजस्थान के प्रसूति गृहों में मौतों का ‘रहस्य’; क्या वेंटिलेटर पर जा रही माताओं की जिंदगी के पीछे नकली दवाओं का नेटवर्क?
  • कोटा में फेल हुआ ‘ऑक्सीटोसिन’ इंजेक्शन, जोधपुर में ‘आईवी फ्लूड’ पर लगी रोक; जांच रिपोर्टों के इंतजार में थमा सिस्टम

राजस्थान का स्वास्थ्य महकमा इन दिनों एक गंभीर और रहस्यमयी संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। प्रदेश के पांच प्रमुख जिलों—कोटा, बीकानेर, जोधपुर, नागौर और डीडवाना-कुचामन—में हाल के हफ्तों में सिजेरियन (ऑपरेशन) डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ने और मौतों के मामलों ने समूचे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यह गंभीर संकट इसलिए अधिक चिंताजनक बन गया है क्योंकि विभिन्न जांच कमेटियों के गठन के बावजूद अब तक मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हो पाया है। हालांकि, सभी प्रभावित अस्पतालों में इस्तेमाल की जा रही जीवन रक्षक दवाओं और इंजेक्शनों के कुछ खास ‘बैच’ संदेह के घेरे में हैं, जिससे प्रदेशभर में हड़कंप मचा हुआ है।

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सभी जिलों में सामने आई घटनाओं में एक डरावनी समानता देखी गई है। प्रसूताओं की तबीयत प्रसव के ठीक बाद अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लडिंग), लो ब्लड प्रेशर, किडनी संक्रमण, सांस लेने में तकलीफ, सेप्टीसीमिया और अंततः मल्टी ऑर्गन फेल्योर के रूप में बिगड़ी, जिसके कारण कई महिलाओं को आईसीयू (ICU) और वेंटिलेटर सपोर्ट पर लेना पड़ा।

कोटा से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला, बीकानेर में दो प्रसूताओं ने तोड़ा दम

इस विवाद की शुरुआत मई 2026 में कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल से हुई थी। वहां ऑपरेशन के बाद जटिलताओं के चलते एक सप्ताह के भीतर चार प्रसूताओं की मौत हो गई। इसके ठीक बाद जून की शुरुआत में बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में ऐसा ही खौफनाक पैटर्न दोहराया गया। यहां सिजेरियन के बाद छह महिलाओं की हालत बेहद नाजुक हो गई। करीब 20 दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद प्रसूता प्रीति की मौत हो गई, जिसके दो दिन बाद शारदा नामक दूसरी प्रसूता ने भी दम तोड़ दिया। वर्तमान में बीकानेर में इस मुद्दे पर भारी जन-आक्रोश है और चिकित्सा लापरवाही के खिलाफ लगातार राजनीतिक आंदोलन जारी हैं। कांग्रेस पीबीएम में धरने पर बैठी है तथा 30 जून को उग्र प्रदर्शन करने जा रही है। प्रशासन इस विरोध को सकारात्मक नहीं लेकर राजनीतिक स्टंट मान रही है।

इसी क्रम में 20 जून को जोधपुर के पावटा अस्पताल में एक ही दिन में सिजेरियन कराने वाली 8 प्रसूताओं की तबीयत अचानक खराब हो गई। इनमें से दो महिलाओं की किडनी फेल होने के कारण उन्हें डायलिसिस के लिए एम्स जोधपुर और एमडीएम अस्पताल रैफर किया गया है, हालांकि यहां अभी तक किसी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, नागौर व डीडवाना के बांगड़ अस्पताल में भी इसी तरह दो प्रसूताओं की मौत के बाद परिजनों ने ₹50 लाख के मुआवजे और नौकरी की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया।

दवाओं के सैंपल फेल होने से गहराया संदेह, कोटा में ‘ऑक्सीटोसिन’ पाया गया अमानक
अस्पतालों में दवा आपूर्ति की निगरानी पर सबसे बड़ा सवाल ड्रग कंट्रोल विभाग की कार्रवाई के बाद खड़ा हुआ है। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि बीकानेर पीबीएम अस्पताल से ऑक्सीटोसिन और पेन किलर सहित कुल 27 दवाओं के सैंपल लेकर जयपुर व कोलकाता की लैब में भेजे गए हैं। जोधपुर मामले में भी एहतियातन 25 दवाओं व इंजेक्शनों (विशेषकर सोडियम लैक्टेट आईवी फ्लूड) के उपयोग पर तत्काल रोक लगाई गई है।

कोटा की जांच में चौंकाने वाला खुलासा

ड्रग कंट्रोलर के अनुसार, इससे पहले कोटा से जो 27 सैंपल उठाए गए थे, उनमें से 26 दवाएं तो मानक के अनुरूप पास हो गईं, लेकिन प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव रोकने के लिए दिया जाने वाला मुख्य ‘ऑक्सीटोसिन’ (Oxytocin) का इंजेक्शन पूरी तरह फेल पाया गया। लैब रिपोर्ट में सामने आया कि बाजार में सप्लाई किए गए इस संबंधित बैच के इंजेक्शन में मुख्य ‘ऑक्सीटोसिन’ तत्व ही गायब था। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रदेशभर में इस बैच की बिक्री पर अलर्ट नोटिस जारी कर तत्काल रोक लगा दी थी।

बजट में 8% की बढ़ोतरी, लेकिन जमीनी हकीकत पर सवाल

एक तरफ जहां राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 32,526 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया है (जो पिछले वर्ष की तुलना में 8% अधिक है), वहीं दूसरी तरफ सरकारी व्यवस्थाओं की इस बड़ी चूक ने सुरक्षित मातृत्व के दावों की पोल खोल दी है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) वर्तमान में 86 है, जो गुजरात (51) जैसे राज्यों से काफी पीछे है। जयपुर के जनाना अस्पताल, जोधपुर के उम्मेद अस्पताल और कोटा-बीकानेर के संभाग स्तरीय महिला चिकित्सालयों के बड़े नेटवर्क के बावजूद, ऑपरेशन थिएटरों में आईसीयू संक्रमण की समय पर जांच न होना और सब-स्टैंडर्ड दवाओं की आपूर्ति होना राज्य की स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल
सबसे बड़ी बात यह है कि लगभग सभी मामलों में कमेटियां बनाई गईं और अब तक किसी भी कमेटी की तरफ से रिपोर्ट सामने नहीं आई है कि ये मौतें आखिर हुईं कैसे? इधर चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री बार बार महिलाओं को अपमानित करने वाले बयान देकर अपने दायित्व से पला जाड़ रहें हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन और सरकार हर घटना को अलग-अलग कारणों से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिन अस्पतालों में ये घटनाएं हुईं, वहां इस्तेमाल हो रही कुछ दवाओं के बैचों पर रोक लगाए जाने से संदेह और गहरा गया है। आवश्यकता इस बात की है की सरकार गंभीरता के साथ इस मामले को सुलझाने का प्रयास करें व दोषियों को सजा देवें।

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