शिक्षा निदेशालय पर आंदोलन की आहट, पदस्थापन काउंसलिंग और डीपीसी की मांग को लेकर मंत्रालयिक कर्मचारियों का नोटिस
कमल नारायण आचार्य


बीकानेर , 12 अप्रैल। शिक्षा विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ राजस्थान, बीकानेर के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को ईमेल एवं स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक औपचारिक नोटिस भेजकर चेतावनी दी है कि यदि 15 अप्रैल तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।


प्रमुख मांगें और समय सीमा


संघ ने स्पष्ट किया है कि मंत्रालयिक संवर्ग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदस्थापन ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से किए जाएं। इसके अलावा, निम्नलिखित पदों पर वर्ष 2025-26 की नियमित डीपीसी (DPC), रिव्यु और बकाया डीपीसी का कार्य 15 अप्रैल 2026 तक पूर्ण किया जाए:
सहायक कर्मचारी से कनिष्ठ सहायक , कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक ,
वरिष्ट सहायक से सहायक प्रशासनिक अधिकारी ,सहायक प्रशासनिक अधिकारी से अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी
साथ ही, आरपीएससी (RPSC) 1986 के कनिष्ठ सहायकों की बकाया डीपीसी और आरपीएससी 2018 में चयनित कनिष्ठ सहायकों की वरिष्ठता निर्धारण की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
आंदोलन की रणनीति
प्रदेशाध्यक्ष आचार्य ने बताया कि यदि निर्धारित तिथि तक आदेश जारी नहीं होते हैं, तो रणनीति के अनुसार –
21 अप्रैल 2026 (मंगलवार): शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया जाएगा।
अनिश्चितकालीन धरना: यदि एक दिवसीय धरने के बाद भी समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरने में बदल दिया जाएगा।
उच्चाधिकारियों को भेजा नोटिस
यह नोटिस राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, मुख्य सचिव, और शिक्षा निदेशक सहित सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेषित किया गया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समयबद्ध रूप से निर्णय नहीं लिया गया, तो उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी राज्य सरकार और शिक्षा प्रशासन की होगी।


