इंद्रिय संयम से ही संभव है कर्म बंधन से मुक्ति’— मुक्तांजना श्री जी
इंद्रिय संयम से ही संभव है कर्म बंधन से मुक्ति’— मुक्तांजना श्री जी
इंद्रिय संयम से ही संभव है कर्म बंधन से मुक्ति’— मुक्तांजना श्री जी
वचन और वाणी का हर पल सदुपयोग करें: गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर
धनीनाथ गिरि मठ में ऋषि पंचमी पर सप्तऋषियों का पूजन और विशेष अनुष्ठान
जैन धर्म ग्रंथ कल्प सूत्र पर क्विज प्रतियोगिता में ज्ञान, ध्यान, गीत व अभिनय का रोचक प्रदर्शन
ज्ञानशाला के किशोर हिमांशु कोठारी के अठाई तप का भव्य अभिनंदन
बीकानेर में ‘सनातन उत्सव’ का भव्य आयोजन
साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य रामलालजी के सान्निध्य में 9 मुमुक्षुओं की जैन भगवती दीक्षा हुयी
जन्मभूमि गंगाशहर में मुनि श्री कमल कुमार जी का तेरापंथ भवन में स्वागत समारोह
मनोरंजन से आत्मरंजन की ओर जाने का समय है चातुर्मास – मुनि हिमांशुकुमार