वचन और वाणी का हर पल सदुपयोग करें: गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर
वचन और वाणी का हर पल सदुपयोग करें: गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर
वचन और वाणी का हर पल सदुपयोग करें: गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर
संसार: पाप और पुण्य का मैदान- मेहुल प्रभ सागर जी
तारादेवी बैद के संलेखना संथारे का 74वाँ दिन, अद्भुत मनोबल का उदाहरण
साध्वी दीपमाला की तपस्या के अनुमोदनार्थ सांझी और वरघोड़ा
जेठमल छाजेड़ ने आडंबरमुक्त और साधनायुक्त तपस्या करके उदाहरण प्रस्तुत किया – मुनि कमल कुमार
दादा गुरुदेव के ‘इकतीसा’ का 7 घंटे तक सामूहिक पाठ
दीक्षार्थी हनुमानमल जी दूगड़ का अभिनंदन समारोह