आत्म-कल्याण के लिए ‘स्व’ को पहचानना आवश्यक, खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी का बीकानेर से विहार
आत्म-कल्याण के लिए ‘स्व’ को पहचानना आवश्यक, खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी का बीकानेर से विहार
आत्म-कल्याण के लिए ‘स्व’ को पहचानना आवश्यक, खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी का बीकानेर से विहार
जैन धर्मऔर साधना का मर्म-“राग-द्वेष को कम कर वीतरागता की ओर बढ़ना ही मुख्य लक्ष्य” — साध्वी विशदप्रज्ञा
श्री सांवलिया पार्श्वनाथ जिनालय के भव्य द्वार का उद्घाटन और सत्तर भेदी पूजा संपन्न
हाथी-घोड़ों के साथ निकला भव्य वरघोड़ा, आज 15 प्रतिमाओं की होगी अंजन शलाका
गंगाशहर में सांवलिया पार्श्वनाथ मंदिर में अंजन शलाका कल, कल निकलेगा भव्य वर घोड़ा
सेवा केन्द्रों को तेरापंथ धर्मसंघ के तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है: साध्वी श्री विशदप्रज्ञा
आत्मा अजर-अमर, संथारा है जीवन के महोत्सव का मार्ग: साध्वी विशदप्रज्ञा
आगम’ की गहराई में छिपे हैं जीवन के अनमोल रत्न
177 वर्ष पुराने गोल मंदिर का भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव 4 फरवरी से; गूंजेंगे खरतरगच्छाधिपति के प्रवचन
साधु-साध्वियों के भीतर निष्ठा और धैर्य जगाने के लिए मर्यादा महोत्सव मनाया जाता है – मुनिश्री कमल कुमार