तेरापंथ धर्मसंघ का आधार है मर्यादा- मुनि कमल कुमार

तेरापंथ धर्मसंघ का आधार है मर्यादा- मुनि कमल कुमार
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तेरापंथ धर्मसंघ एक मर्यादित और अनुशासित धर्मसंघ है। इस धर्मसंघ के प्रथम आचार्य भिक्षु हुए। जिन्होंने वि.स. 1817 आसाढ़ शुक्ला पूर्णिमा के दिन राजस्थान के मेवाड़ प्रान्त में केलवा नगर में भाव दीक्षा स्वीकार कर इसकी स्थापना की। वि.स. 1832 में प्रथम मर्यादा पत्र लिखा और अपने संघ के उत्तराधिकारी श्री भारीमालजी का चयन किया। समय समय पर अनेक मर्यादा पत्र लिखे। अंतिम मर्यादा पत्र वि.स.1859 माघ शुक्ला सप्तमी को लिखा और वि.स. 1860 भाद्रव शुक्ला त्रियोदशी के दिन मारवाड़ के सिरियारी नामक गांव में आपने संथारे पूर्वक अंतिम श्वास ली। आचार्य भिक्षु एक महान, साधक थे उन्हें आगमों का गहरा ज्ञान था उन्होंने साधुओं के शुद्ध संयम साधुत्व के लिये जो मर्यादाएं बनाई उनको संघ का आधार मानकर उन्हीं के चतुर्थ पट्टधर श्रीमद् जयाचार्य एक दूरदर्शी आचार्य हुए उन्होंने संघ विकास के लिए धर्मसंघ को तीन उत्सव प्रदान किये पट्टोत्सव, मर्यादा महोत्सव और चरमोत्सव।

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वर्तमान आचार्य का पट्टोत्सव प्रथम आचार्य का चरमोत्सव और माघ शुक्ला सप्तमी जो अंतिम मर्यादा पत्र की तिथि है उस दिन माघ महोत्सव मनाया जाये। उनकी परिकल्पना के आधार इस धर्मसंघ में उत्सवों की शुरुवात हुई और पूरा धर्मसंघ केवल एक मर्यादा महोत्सव को छोड़कर निरंतर उत्सवों को बड़ी ही श्रद्धा के साथ इसे मना रहा है। एक मर्यादा महोत्सव के अवसर पर राज्य के राजा गंगासिंहजी का स्वर्गवास हो गया था। पूरे राज्य में शोक का माहोल था अतः उसे विधि पूर्वक नहीं मनाया गया। यह उत्सव तृदिवसीय मनाया जाता है जिसकी तीन तिथियां अनुक्रम से इस प्रकार है पांचम, छट्ठ और सप्तमी है। पांचम के दिन सबसे पहले वृद्ध रुग्ण ग्लान साधु साधियों के सेवा केन्द्रों की नियुक्तियां की जाती है। जिससे उन स्थविरों की व्यवस्थित सेवा परिचर्या हो सके। जिस परिवार समाज और देश में सेवा का क्रम चलता है वहां अमन चैन का वातावरण बना रहता है और हम साक्षात यह अनुभव कर रहे है। छट्ठ के दिन मर्यादा अनुशासन संबंधी विशेष प्रवचन होते है।

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सप्तमी के दिन बड़ी हाजरी होती है अर्थात आचार्य मिथु द्वारा लिखित मर्यादाओं का वाचन होता है जिसे उपस्थित साधु-साध्वियां प्रवचन में खड़े खड़े श्रद्धा से श्रवण ही नहीं करते उसका उच्चारण भी करते हैं हजारों श्रावक श्राविकायें इस नयनाभिराम दृश्य को देखकर नत मस्तक हो जाते हैं। इसीदिन प्रवचन में साधु साध्वियों के चतुर्मासों की नियुक्तियां होती है जहां जिसका चतुर्मास नियुक्त किया जाता है वे साधु साध्वी खड़े खड़े उसे स्वीकार कर गुरूदवे को वंदन करते है। जिन क्षेत्रों में जिनजिन साधु साध्वियों की नियुक्तियां की जाती है श्रावक श्राविकायें उन्हें बड़ी श्रद्धा और सेवा के साथ अपने अपने क्षेत्रों में ले जाते है, जिससे उन क्षेत्रों में व्यवस्थित धर्मप्रचार होता रहे।

यह 162 वा मर्यादा महोत्सव खाटू में तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशवें पट्टघर आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन चरणों में मनाया जा रहा है वहाँ अनेक साधु-साध्वियों के साथ हजारों श्रावक श्राविकाएं इस महोत्व को देखने देश विदेश से गुरुचरणों में उपस्थित होंगे इस समय गुरुदेव संघ की सुव्यवस्था के लिए कई नई मर्यादाएं भी बताते है जिससे यह संघ दीर्घ जीवी बना रहे।

 

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