बीकानेर में जानलेवा हमले के दो आरोपियों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा

बीकानेर कोर्ट का बड़ा फैसला
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बीकानेर, 25 अप्रैल। विशिष्ट सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी प्रकरण) बीकानेर, पीठासीन अधिकारी विकास कालेर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए जानलेवा हमले के मामले में दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है।मामला थाना नोखा के एफआईआर नंबर 422/2010 से संबंधित है, जिसमें परिवादी मोहनलाल पुत्र रामचंद्र सियाग ने 4 अक्टूबर 2010 को अभियुक्त जयराम जाटव व बालूराम जाट के विरुद्ध जानलेवा हमला (धारा 307 आईपीसी) एवं मारपीट (धारा 323, 341 आईपीसी) का मुकदमा दर्ज करवाया था।

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मामले के अनुसार, मोहनलाल की पुत्री का विवाह बालूराम जाट निवासी बीरमसर के साथ हुआ था। आरोप है कि विवाह में कम दहेज लाने के चलते बालूराम व उसका बहनोई जयराम परिवादिनी को प्रताड़ित करते थे। बाद में मोहनलाल अपनी पुत्री को ससुराल से अपने घर ले आया। इसी को लेकर बालूराम व जयराम मोहनलाल की ढाणी आए और विवाद हुआ।प्रकरण के दौरान यह भी सामने आया कि जब मोहनलाल अपने पुत्र नेमीचंद की जमानत कराने नोखा गया था और वापस बीकानेर लौट रहा था, तब सुजानगढ़ रेलवे फाटक के पास अभियुक्तों ने मोहनलाल और उसके परिवारजनों पर जानलेवा हमला किया। दोनों आरोपियों ने लाठियों से सिर, हाथ और पैरों पर गंभीर चोटें पहुंचाईं, जिसके बाद राहगीरों के एकत्र होने पर आरोपी फरार हो गए। घायल मोहनलाल का अस्पताल में इलाज कराया गया।

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अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाह प्रस्तुत किए गए तथा दस्तावेज एवं आर्टिकल्स पेश कर अभियोजन का समर्थन किया गया। सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त जयराम जाटव और बालूराम जाट को धारा 307 आईपीसी में प्रत्येक को सात वर्ष का कठोर कारावास तथा अर्थदंड, वहीं धारा 341 आईपीसी में दो वर्ष का कठोर कारावास व अर्थदंड से दंडित किया।प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक जगदीश रैन ने पैरवी की, जबकि परिवादी की ओर से अधिवक्ता कौशल सांखला ने सशक्त पैरवी करते हुए न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

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