20 करोड़ की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड विष्णु बिश्नोई गिरफ्तार, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के जरिए देशव्यापी गिरोह को भेजता था रकम
20 करोड़ की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड विष्णु बिश्नोई गिरफ्तार



बीकानेर, 9 जून। बीकानेर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। साइबर पुलिस थाना और खाजूवाला पुलिस की एक संयुक्त टीम ने मिलकर देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड को दबोचने में कामयाबी पाई है। गिरफ्तार किए गए आरोपी पर देश भर के अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी के करीब 25 मामले दर्ज हैं और उसके द्वारा 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के अवैध लेनदेन का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।


आईजी व एसपी के निर्देशन में हुई बड़ी कार्रवाई
बीकानेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ओमप्रकाश और कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक विशाल जांगिड़ के विशेष दिशा-निर्देशों पर इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। साइबर थाना प्रभारी शालिनी बजाज के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण और जमीनी इनपुट के आधार पर खाजूवाला थाना क्षेत्र के चक 14 बीडी के रहने वाले 23 वर्षीय युवक विष्णु बिश्नोई को गिरफ्तार किया है।


20 करोड़ से अधिक की ठगी का है आरोप
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और जांच में सामने आया है कि आरोपी विष्णु बिश्नोई साइबर ठगी करने वाले एक बेहद संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोह से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था। उसने खुद के और कई अन्य लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर बेहद कम समय में 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का ट्रांजेक्शन किया। केंद्रीय जांच एजेंसियों और देशभर के अलग-अलग राज्यों की पुलिस में इसके खिलाफ 25 साइबर फ्रॉड की शिकायतें पहले से ही दर्ज हैं।
क्रिप्टोकरेंसी और यूएसडीटी (USDT) के जरिए होती थी मनी लॉन्ड्रिंग
पुलिस पड़ताल में आरोपी की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ठगी का शिकार हुए लोगों से जो राशि खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी, आरोपी विष्णु उसे विभिन्न बैंक खातों में घुमाता था। इसके बाद वह एक ऑनलाइन पी2पी (P2P) प्लेटफॉर्म के माध्यम से उस भारतीय मुद्रा को यूएसडीटी (USDT) नामक क्रिप्टोकरेंसी में बदल देता था और मुख्य साइबर ठग गिरोह के वॉलेट में ट्रांसफर कर देता था। इस पूरी मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया को अंजाम देने के बदले में वह कुल राशि का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा बतौर कमीशन अपने पास रखता था।
बैंक खाते फ्रीज होने पर लेता था हवाला का सहारा
साइबर फ्रॉड के मामलों में जब पीड़ित देश के किसी भी कोने से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते थे, तो आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खाते फ्रीज (बंद) हो जाते थे। ऐसी स्थिति में कानून और जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए आरोपी विष्णु बिश्नोई हवाला नेटवर्क का सहारा लेता था। वह हवाला के जरिए ठगी की नकद रकम को देश-विदेश में बैठे गिरोह के मुख्य सरगनाओं तक सुरक्षित पहुंचाता था।
कई बैंक खाताधारक जांच के दायरे में, बड़ा नेटवर्क टूटने की उम्मीद
पुलिस को अंदेशा है कि इस रैकेट की जड़ें बहुत गहरी हैं। आरोपी ने जिन स्थानीय और बाहरी लोगों के बैंक खातों (कमीशन के आधार पर) का उपयोग ठगी की रकम को खपाने के लिए किया था, अब साइबर पुलिस और खाजूवाला पुलिस उन सभी खाताधारकों की सूची तैयार कर उनसे सघन पूछताछ कर रही है।
इस पूरी सफल कार्रवाई में साइबर थाना बीकानेर की विशेष टीम के साथ खाजूवाला थानाधिकारी सुरेंद्र प्रजापत और उनकी टीम की मुख्य भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य राज्यों के गिरोह भी शामिल हैं। क्रिप्टोकरेंसी और हवाला के इस त्रिकोणीय गठजोड़ की परतें खुलने के साथ ही आने वाले दिनों में कई और बड़ी गिरफ्तारियां और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना है।


