लेखक को साहित्य रचते समय कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है – तिवाड़ी
लेखक को साहित्य रचते समय कई चुनौतियों का करना पड़ता है सामना- तिवाड़ी

- ‘सृजन सौरभ लक्ष्मीनारायण रंगा’ समारोह में बोले मालचंद तिवाड़ी
बीकानेर, 18 अक्टूबर। अजित फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘सृजन सौरभ लक्ष्मीनारायण रंगा’ समारोह के समापन अवसर पर ‘लक्ष्मीनारायण रंगा रचना संसार – साहित्य, शिक्षा एवं रंगकर्म’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि साहित्य सृजन करते समय लेखक के सामने अनेक चुनौतियां होती हैं, जिन्हें लक्ष्मीनारायण रंगा ने बखूबी निभाते हुए नवांकुरों के लिए नए अवसर पैदा किए। उन्होंने रंगा के नाटकों को राष्ट्रीय स्तर का बताते हुए उनके मंचन और साहित्य के संचयन प्रकाशन की आवश्यकता पर जोर दिया।


मुख्य वक्ता साहित्यकार हरीश बी. शर्मा ने रंगा जी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक साहित्यकार और रंगकर्मी के साथ-साथ भाषाविद एवं शिक्षाविद भी थे। उन्होंने अपने नाटकों, लघुकथाओं और व्यंग्य रचनाओं के जरिए सामाजिक कुप्रथाओं पर प्रहार किया तथा राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष किया। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने उनके साहित्य संचयन के प्रकाशन का विश्वास दिलाया। संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने मंच संचालन किया तथा अंत में गिरिराज पारीक ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जुगलकिशोर पुरोहित, नरसिंह बिन्नानी, मोहम्मद फारूक, डॉ. अजय जोशी, कासीम बीकानेरी सहित शहर के अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

