बीकानेर में परिवहन विभाग की लचर व्यवस्था से थमे चक्के
बीकानेर में परिवहन विभाग की लचर व्यवस्था से थमे चक्के



- व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) के फेर में अटके सैकड़ों नेशनल परमिट, प्रतिदिन हो रहा लाखों का नुकसान
बीकानेर, 24 जून । केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा लागू किए गए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) संबंधी नए आदेश बीकानेर संभाग के ट्रांसपोर्ट व्यवसाय और वाहन मालिकों के लिए जी का जंजाल बन गए हैं। परिवहन विभाग की अधूरी प्रशासनिक तैयारियों और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव के कारण बीकानेर क्षेत्र में गुड्स व्हीकलों (मालवाहक वाहनों) के नेशनल परमिट जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह से ठप हो गई है। विभागीय सुस्ती और असमंजस के चलते पिछले करीब एक महीने से नए परमिट जारी नहीं हो पा रहे हैं, जिससे सैकड़ों वाहन मालिक और ट्रांसपोर्टर्स आरटीओ (RTO) कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार ने पुराने कमर्शियल वाहनों में VLTD (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) लगाने की अनिवार्यता तो सख्ती से लागू कर दी है, लेकिन राजस्थान के परिवहन कार्यालयों में इस कार्य हेतु अधिकृत कंपनियों के चयन, डिवाइस के मानकों और फिटमेंट की ऑनलाइन प्रक्रिया को अब तक स्पष्ट नहीं किया गया है। इसके चलते बीकानेर आरटीओ कार्यालय में सैकड़ों नेशनल परमिट के आवेदन फाइलों में दबे पड़े हैं। एक तरफ जहां परमिट जारी नहीं हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिना परमिट के सड़कों पर वाहन संचालित करने पर परिवहन विभाग द्वारा 10 हजार रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। इस दोहरी मार के कारण वाहन मालिक भारी आर्थिक और प्रशासनिक दबाव झेल रहे हैं, जिससे स्थानीय परिवहन उद्योग को प्रतिदिन लाखों रुपये की चपत लग रही है और माल परिवहन व्यवस्था भी पटरी से उतर चुकी है।


वाहनों के पुनःपंजीयन (Re-registration) की सेवा भी ठप, राष्ट्रीय राजमार्गों पर कट रहे अंधाधुंध चालान
परिवहन विभाग की अव्यवस्था यहीं नहीं रुकती; व्यावसायिक वाहनों जैसे बस, ट्रक, पिकअप और अन्य भारी मालवाहक वाहनों के पुनःपंजीयन (Re-registration) संबंधी कार्य भी लंबे समय से पूरी तरह बाधित हैं। विभागीय तकनीकी खामियों के चलते ‘वाहन सिटीजन पोर्टल’ पर इस आवश्यक सेवा का विकल्प ही गायब है। इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा क्षेत्रीय या कार्यालय स्तर पर इनवार्ड (मैन्युअल एंट्री) अथवा किसी अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की शुरुआत नहीं की गई है। इसके परिणामस्वरूप वाहन मालिक चाहकर भी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने वाहनों का री-रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पा रहे हैं। इस विभागीय नाकामी का खामियाजा भुगतते हुए जब ये वाहन राष्ट्रीय राजमार्गों और टोल प्लाजा से गुजरते हैं, तो वहाँ परिवहन विभाग और पुलिस द्वारा इनके भारी चालान काटे जा रहे हैं तथा बिना गलती के अतिरिक्त पेनल्टी (जुर्माना) थोपी जा रही है। पीड़ित वाहन मालिकों का गंभीर आरोप है कि आरटीओ के उच्चाधिकारियों को बार-बार वस्तुस्थिति से अवगत कराने के बावजूद समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
वकीलों के शिष्टमंडल ने राज्य सरकार को भेजा ज्ञापन, आधारभूत व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग
इस गंभीर प्रशासनिक अव्यवस्था और ट्रांसपोर्टर्स के उत्पीड़न को लेकर अब कानूनी विशेषज्ञों ने भी मोर्चा खोल दिया है। बीकानेर बार एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा, एडवोकेट बनवारी, हरिराम जालप, प्रेम विश्नोई एवं सुरेंद्र विश्नोई के एक उच्चस्तरीय शिष्टमंडल ने इस संबंध में राज्य सरकार और परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों को एक कड़ा ज्ञापन प्रेषित कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। ज्ञापन में वकीलों ने तर्कसंगत सवाल उठाते हुए कहा कि जब परिवहन विभाग द्वारा अब तक राजस्थान में अधिकृत वेंडर या एजेंसियों का निर्धारण ही नहीं किया गया है, तो वाहन मालिक आख़िर यह VLTD उपकरण कहाँ से खरीदें और किस माध्यम से लगवाएं?
शिष्टमंडल ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक ओर तो नित नए नियमों और डिजिटल व्यवस्थाओं को बिना तैयारी के तत्काल प्रभाव से थोप दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर उनकी जमीनी क्रियान्विति के लिए आवश्यक आधारभूत और तकनीकी बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं कराया जाता। इसका सीधा और आर्थिक नुकसान सिर्फ और सिर्फ वाहन मालिकों, ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और आम जनता को उठाना पड़ रहा है।
एसोसिएशन ने रखीं मुख्य मांगें
बीकानेर सिटीजन एसोसिएशन एवं बीकानेर बार एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से राज्य सरकार और परिवहन मंत्री से निम्नलिखित मांगें त्वरित प्रभाव से पूरी करने की गुहार लगाई है।
स्पष्ट एसओपी (SOP) जारी हो: VLTD लगाने के संबंध में तुरंत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर अधिकृत एजेंसियों को सार्वजनिक किया जाए।
लंबित परमिटों का निस्तारण: बीकानेर आरटीओ कार्यालय में अटके हुए सभी नेशनल परमिट आवेदनों का विशेष अभियान चलाकर शीघ्र निस्तारण किया जाए।
ऑफलाइन विकल्प की बहाली: री-रजिस्ट्रेशन (पुनःपंजीयन) की ऑनलाइन तकनीकी खामी दूर होने तक तत्काल वैकल्पिक ऑफलाइन (मैन्युअल) व्यवस्था शुरू की जाए, ताकि निर्दोष वाहन मालिकों को अनावश्यक चालान, पेनल्टी और भारी आर्थिक नुकसान से तत्काल राहत मिल सके।


